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परिवारवाद की अमरबेल… कांग्रेस अछूती न भाजपा, दिग्गजों ने ‘अपनों’ को सौंपी विरासत

राजनीति में परिवारवाद का इतिहास पुराना हैं, जो आज तक बरकरार हैं। कांग्रेस हो या भाजपा कोई भी राजनीतिक दल इससे अछूता नहीं रहा है।

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जयपुर

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Rahul Singh

Oct 28, 2023

Rajasthan Assembly Election 2023

Rajasthan Assembly

राजनीति में परिवारवाद का इतिहास पुराना हैं, जो आज तक बरकरार हैं। कांग्रेस हो या भाजपा कोई भी राजनीतिक दल इससे अछूता नहीं रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कई बड़े राजनेता सांसद, विधायक चुने गए, वहीं जब खुद ने संन्यास लिया तो अपने पुत्र-पुत्रियों और अन्य रिश्तेदारों को राजनीति के मैदान में उतार दिया।

मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति तक पहुंचे
जयपुर में प्रमुख रूप से 10 से ज्यादा ऐसे राजनेताओं के परिवार हैं जो राजनीति में ऊंचाइयों तक पहुंचे। जो न सिर्फ सरकार में मंत्री बने, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका भी मिला। इनमें भैरोंसिंह शेखावत शामिल हैं। वे तीन बार मुख्यमंत्री रहे और उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचेे। यहीं नहीं कांग्रेस के रामकिशोर व्यास भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपराज्यपाल बने। इसके अलावा नवलकिशोर शर्मा भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री बने थे।

दौसा और सीकर से लेकर जयपुर तक का सफर
भैरोंसिंह शेखावत सीकर के थे वहीं नवलकिशोर शर्मा दौसा के थे। लेकिन इन्होंने जयपुर से भी चुनाव लडकऱ विधानसभा पहुंचेे। कुछ राजनेताओं के परिवार में से पुत्र और पुत्रियों ने चुनाव तो लड़ा लेकिन वो हार गए।

यूं चली परिवारवाद की लहर
- कांग्रेस से नवल किशोर शर्मा 1984 में जयपुर से सांसद और 1998 में जयपुर ग्रामीण से विधायक रहे। इनके पुत्र बृजकिशोर शर्मा 2003 में जयपुर ग्रामीण और 2008 में हवामहल विधानसभा सीट से विधायक रहे।
- जनसंघ से भैरोंसिंह शेखावत किशनपोल से विधानसभा का चुनाव जीते। इनके दामाद नरपत सिंह राजवी चित्तौडगढ़़ और विद्याधर नगर से विधायक रहे हैं। इस बार भाजपा ने उन्हें चित्तौडगढ़़ से प्रत्याशी घोषित किया है। शेखावत के भतीजे प्रताप सिंह खाचरियावास सिविल लाइंस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर दूसरी बार विधायक और वर्तमान में केबिनेट मंत्री हैं।

- हवामहल विधानसभा सीट से भाजपा के भंवरलाल शर्मा छह बार विधायक रहे। उनकी पुत्री मंजू शर्मा ने 2008 में इसी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
- कांग्रेस में पूर्व मंत्री तकीउद्दीन अहमद जौहरी बाजार सीट से 1980 और 1998 में विधायक रहे और गहलोत सरकार में मंत्री भी बने। तकीउद्दीन के भाई शाह इकरामुद्दीन को किशनपोल और जौहरी बाजार से टिकट मिला, लेकिन वो जीत नहीं पाए।
- सहदेव शर्मा कांग्रेस पार्टी से आमेर से विधायक रह चुके हैं। उनके पुत्र प्रशांत शर्मा भी 2018 में इसी सीट से चुनाव लड़े मगर हार गए।
- केबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया आमेर और झोटवाड़ा सीट से विधायक व जयपुर ग्रामीण सीट से सांसद रह चुके हैं। उनके पिता रामप्रताप कटारिया 1985 के आमेर के उपचुनाव में विधायक बने थे। लालचंद के भाई की पत्नी रेखा कटारिया भी 2013 में झोटवाड़ा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी, लेकिन हार गई।
- किशनपोल विधानसभा सीट से कांग्रेस के श्रीराम गोटेवाला 1972 और 1980 में विधायक और मंत्री बने। उनके भाई राधेश्याम गोटेवाला को भी 1985 में इसी सीट से टिकट दिया गया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाए।
- हवामहल और चौमूं से कांग्रेस से रामकिशोर व्यास विधायक रह चुके हैं। उनके पुत्र रमाकांत व्यास को 1985 में चौमूं से टिकट मिला, लेकिन वे चुनाव जीत नहीं पाए।
- गायत्री देवी जयपुर से सांसद रहीं। उनके पुत्र भवानी सिंह ने भी जयपुर लोकसभा सीट से 1989 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। भवानी सिंह की पुत्री दीया कुमारी सवाईमाधोपुर से विधायक रहीं। अभी राजसमंद से भाजपा सांसद हैं। उन्हें भाजपा ने इस बार विद्याधर नगर से उम्मीदवार बनाया है।
- कांग्रेस के पूर्व जयपुर शहर अध्यक्ष सलीम कागजी के पुत्र अमीन कागजी अभी किशनपोल विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे एक बार चुनाव हार चुके हैं।