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राजस्थान के किसान ने थार में उगा दी ‘बर्फीली केसर’, इस तरीके से एक बीघा खेत को बना डाला ‘केसर का बगीचा’

राजस्थान के किसान ने थार में उगा दी 'बर्फीली केसर', इस तरीके से एक बीघा खेत को बना दिया 'केसर की क्यारी'

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जयपुर

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rohit sharma

May 07, 2019

saffron farming

saffron farming

जयपुर।

राजस्थान में भीषण गर्मी के प्रकोप से सभी लोग वाकिफ है। गर्मी की शुरूआत में ही चिलचिलाती धूप कंठ सुखा देती है। ऐसे में प्रदेश के किसानों ( Rajasthan farmers ) को भी गर्मी और मौसम परिवर्तन के दौरान फसलों की बुवाई में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

किसान अमूमन ऐसी फसलों पर ज्यादा फोकस करते है जिनमें पानी कम लगे और पैदावार अच्छी हो। वहीं, राजधानी के एक किसान ने 'थार' में 'बर्फीली केसर' ( Saffron Farming ) उगाकर सभी को अचरज में डाल दिया है। आमेर के मेहंदी का बास निवासी किसान सीताराम ने लीक से हटकर केसर की फसल उगा दी। केसर की तुडाई हो चुकी है अब यह केसर बिक्री के लिए तैयार है।

इस तरीके से की अमेरीकन केसर की खेती ( Saffron Farming in Rajasthan )

किसान सीताराम का कहना है कि यह अमेरीकन केसर ( american saffron ) है। एक परिचित से उन्होंने कश्मीर से इसके बीज मंगाए और एक बीघा जमीन में इसकी खेती की। चूंकि केसर का पौधा ठंडे प्रदेश में उगता है इसलिए बारिश खत्म होने के बाद सितंबर माह के अंत में इसके बीज बोए गए। इस समय वातारण में नमी रहती है साथ ही कुछ समय बाद सर्दी दस्तक दे देती है इसलिए यह समय सबसे उपयुक्त है।


पूरा खेत बन गया केसर का बगीचा

किसान सीताराम ने बताया कि पौधे के विकसित होने पर (जब इसमें फूल निकलते है) हर चार से पांच दिन में अच्छी तरह से सिंचाई करनी पड़ती है ऐसे में पानी की कमी की वजह से थोड़ी दिक्कत का सामना उन्हें भी करना पड़ा। बुवाई के छह महीने बाद मार्च के अंत में जब केसर का फूल पूरी तरह से पककर लाल हो गया तो केसर तोड़ ली गई। इसके बाद इसे सुखाकर तैयार कर लिया। एक बीघा जमीन में हुई खेती से सैनी को 15 से 16 किलो केसर प्राप्त हुई।


थार के वातावरण के कारण है थोड़ी अलग

उन्होंने बताया कि वातावरण बदलने के कारण यह केसर कश्मीरी केसर से थोड़ी अलग है। कश्मीर में केसर का पौधा थोड़ा छोटा होता है। वहीं, यहां जो केसर के पौधे हुए उनकी लंबाई चार से पांच फुट रही। साथ ही इसके रंग पर भी आंशिक असर पड़ा। लेकिन पूरी सर्तकता और देखभाल के साथ इसे उगाया गया जिससे इसकी गुणवत्ता और स्वाद पर कोई फर्क नहीं पड़ा।