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रिफाइनरी के कार्य शुभारंभ काे लेकर पीएम माेदी पर बरसे अशाेक गहलाेत, जानिए क्या बोले

रिफाइनरी के कार्य शुभारंभ पर अशाेक गहलाेत ने कहा कि PM चार साल पहले कांग्रेस की आेर से लाॅन्च की गर्इ याेजना काे फिर से लाॅन्च किया है।

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ashok gehlot

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने मंगलवार काे बाड़मेर में हजाराें लाेगाें के बीच रिफाइनरी का कार्य शुभारंभ किया। रिफाइनरी के कार्य शुभारंभ पर प्रदेश के पूर्व CM अशाेक गहलाेत ने tweet कर कहा कि प्रधानमंत्री ने चार साल पहले कांग्रेस की आेर से लाॅन्च की गर्इ याेजना काे फिर से लाॅन्च किया है।

एक अन्य tweet में गहलाेत ने कहा कि पीएम माेदी ने राजस्थान की जनता काे निराश किया है। उन्हाेंने परवन बांध परियाेजना, जयपुर मेट्रो के सेकंड फेज,मेमू कोच फैक्ट्री और डूंगरपुर-बंसवाडा-रतलाम रेलवे लाइन काे लेकर कुछ नहीं कहा। पीएम ने कांग्रेस की बिना किसी तथ्य और गलत आंकड़ों के साथ केवल आलोचना की।

कांग्रेस पार्टी ने भी उप चुनावाें से पहले रिफाइनरी का कार्य शुभारंभ करने पर भाजपा काे आड़े हाथ लिया। पार्टी की आेर से किए गए एक tweet में कहा गया है कि मोदी सरकार को लगभग 4 साल होने वाले हैं और आज भी उसे अपनी फोटो खिंचवाने के लिए कांग्रेस के किए कामों का ही फीता काटना पड़ रहा है।

अशोक गहलोत ने कहा कि चुनावी लाभ लेने के लिए रिफाइनरी का पुन: शिलान्यास कराया जा रहा है, जबकि रिफाइनरी का शिलान्यास चार साल पहले ही 22 सितम्बर 2013 काे सोनिया गांधी कर चुकी हैं। राज्य सरकार की हठधर्मिता से रिफाइनरी का काम चार साल तक अटका रहा। लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन योजनाओं का शिलान्यास पुन: कराया जाना स्वस्थ्य परम्परा नहीं है।

मालूम हाे कि इस मामले को लेकर गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विराेध जताया था, जिसके बाद कार्यक्रम का नाम शिलान्यास से बदलकर शुभारंभ कार्यक्रम कर दिया गया।

गहलाेत ने एक प्रेस सम्मेलन में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यदि रिफाइनरी समय से शुरू हो जाती तो अब तक काम पूरा होने के साथ ही चालू हो जाती।

इस परियोजना को इतने लम्बे समय तक इसलिए रोका गया, जिससे कि कांग्रेस को इसका श्रेय नहीं मिल सके, जबकि इस प्रोजेक्ट में देरी होने से राजस्थान के हजारों युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ा।

सरकार को राजस्व हानि भी हुई। इतना ही नहीं रिफाइनरी चालू होने के साथ ही लगने वाले हजारों सहयोगी लघु उद्योग भी नहीं लग सके। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वर्ष के चलते रिफाइनरी परियोजना को लेकर झुकना पड़ा है।

राजस्थान में दो लोकसभा और एक राज्य विधानसभा सीट के लिए चुनावी घोषणा के साथ आचार संहिता लागू हो जाने के बावजूद रिफाइनरी का शिलान्यास किया जाना क्या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है? रिफाइनरी एक जिले अथवा क्षेत्र विशेष के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, वरन यह सम्पूर्ण राज्य को प्रभावित करने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।