अमृतं जलम् अभियान के तहत हर साल गर्मियों से पहले जल स्रोतों को साफ कर वर्षा जल संचयन के लिए तैयार करने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए जनसहयोग से श्रमदान करते हैं। अभियान के तहत श्रमदान के माध्यम से तालाबों से प्लास्टिक, कचरा और गाद हटाई जाती है। अभियान में छात्र, स्काउट गाइड, स्थानीय वासी, अधिकारी और समाजसेवी संस्थाएं मिलकर इन स्थलों की सफाई में योगदान दे रहे हैं। वर्ष 2005 से अब तक हजारों वालंटियर्स 3000 से अधिक जल निकायों का कायाकल्प कर चुके हैं। इस प्रभावशाली पहल के लिए अभियान को 'राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार 2010' से सम्मानित किया गया है।2026 में, इस अभियान के तहत राजस्थान और अन्य राज्यों में विभिन्न स्थानों पर पुरानी बावड़ियों और तलाईयों को पुनर्जीवित करने का कार्य निरंतर जारी है।