
साल में तीन बार आता है अष्टानिका महापर्व
जैन धर्म का अष्टानिका महापर्व कल से
— कोविड—19 के चलते घर—घर होगी पूजा—अर्चना
— ऑनलाइन करेंगे अभिषेक, शांतिधारा आदि के दर्शन
जयपुर। जैन धर्म का अष्टानिका महापर्व (Ashtanika Mahaparva) आषाढ़ शुक्ल अष्टमी पर रविवार से शुरू होगा। आठ दिनों तक इस पर्व में विशेष मण्डल पूजा की जाएगी। इस दौरान सिद्ध चक्र महामण्ड़ल विधान सहित पूजा—अर्चना होगी। श्रद्धालु घरों में ही विशेष पूजा—अर्चना करेंगे।
अष्टानिका महापर्व में मंदिरों में विशेष पूजा, सिद्ध चक्र महामण्डल विधान, नन्दीश्वर विधान, कल्पद्रुम मण्डल विधान सहित कई प्रकार के अनुष्ठान होते है। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन परिषद् के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा के अनुसार कोविड—19 के चलते मंदिरों में भक्तों का प्रवेश बंद होने से इस बार लोग अपने—अपने घरों में ही अष्टानिका महापर्व मनाएंगे। घरों में ही सिद्ध चक्र मण्डल विधान तथा भाव पूजा आदि की जाएगी। मंदिरों में होने वाले अभिषेक, शांतिधारा आदि का आॅनलाइन दर्शन कराया जाएगा। कोविड—19 के चलते पहली बार छोटे रूप में अष्टानिका महापर्व मनाया जाएगा।
साल में तीन बार आता है यह पर्व
अष्टानिका महापर्व का जैन समाज में विशेष महत्व है। यह पर्व साल में तीन बार मनाया जाता है। अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन ने बताया कि आषाढ़, कार्तिक और फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में अष्टमी से पूर्णिमा तक यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को जैन समाज अठाइया भी कहते हैं। आठ दिन तक व्रत, उपवास, ध्यान और आत्म शुद्धि के लिए कठिन तप, व्रत करते हैं।
50 सालों से हो रही पूजा
प्रदेश महामंत्री विनोद जैन के अनुसार जयपुर में गोपालजी का रास्ता स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर काला डेरा (महावीर स्वामी) सहित कई मंदिरों में पिछले 50 सालों से अष्टानिका महापर्व में सिद्ध चक्र महामण्ड़ल विधान पूजा की जाती है।
पद्मपुराण में अष्टानिका महापर्व का वर्णन
प्रदेश महामंत्री विनोद जैन के अनुसार जैन धर्म के प्राचीन व प्रसिद्ध ग्रन्थ पद्मपुराण में अष्टानिका महापर्व का वर्णन करते हुए कहा गया है कि सिद्ध चक्र का अनुसरण करने से कुष्ठ रोगियों को इस रोग से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि महासती मैना सुन्दरी द्वारा अपने पति श्रीपाल के कुष्ठ रोग निवारण के लिए किये गये प्रयासों से इस पर्व की शुरुआत हुई है। मान्यता यह भी है कि इस दौरान स्वर्ग से देवता आकर नन्दीश्वर द्वीप में निरन्तर आठ दिन धर्म कार्य, पूजा अर्चना करते हैं।
Published on:
27 Jun 2020 04:32 pm
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