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मुंबई में अगले साल अश्वमेध महायज्ञ, राजस्थान संभालेगा भोजन व्यवस्था, परोसे जाएंगे ये व्यंजन

Ashvamedha Maha Yagna: गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के तत्वावधान में मायानगरी मुंबई में अगले साल 23 से 28 जनवरी तक 1008 कुंडीय अश्वमेध गायत्री महायज्ञ होगा। गायत्री परिवार राजस्थान को वहां बनने वाले चार भोजनालय में एक की जिम्मेदारी मिली है।

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मुंबई में अगले साल अश्वमेध महायज्ञ, राजस्थान संभालेगा भोजन व्यवस्था, परोसे जाएंगे ये व्यंजन

मुंबई में अगले साल अश्वमेध महायज्ञ, राजस्थान संभालेगा भोजन व्यवस्था, परोसे जाएंगे ये व्यंजन

जयपुर। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के तत्वावधान में मायानगरी मुंबई में अगले साल 23 से 28 जनवरी तक 1008 कुंडीय अश्वमेध गायत्री महायज्ञ होगा। गायत्री परिवार राजस्थान को वहां बनने वाले चार भोजनालय में एक की जिम्मेदारी मिली है। राजस्थान के भोजनालय में दाल, बाटी, चूरमा, कैर-सांगरी की सब्जी, बेजड़ की रोटी जैसे व्यंजन खासतौर पर परासे जाएंगे। इसके लिए राजधानी में अनाज एकत्र करने के लिए आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर काउंटर बनाए जाएंगे।

गायत्री परिवार राजस्थान जोन के प्रभारी ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि मुंबई अश्वमेध महायज्ञ में आमंत्रण देने के लिए शांतिकुंज हरिद्वार की एक टोली आई है। टोली को आश्वासन दिया कि राजस्थान से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मुंबई पहुंचेंगे। भोजनालय सहित अन्य व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर सहयोग करेंगे। राजधानी जयपुर सहित पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता मुंबई अश्वमेध महायज्ञ में शामिल होंगे।

शांतिकुुंज हरिद्वार के व्यवस्थापक महेन्द्र शर्मा ने बताया कि अश्वमेध महायज्ञ एक आध्यात्मिक प्रयोग है। पहली बार महिला टोली अश्वमेध महायज्ञ संपन्न कराएगी। इससे माध्यम से नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया जाएगा। उन्होंने महायज्ञ में सहयोग का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने टोलियां बनाकर लोगों से संपर्क करने पर जोर दिया।

जयपुर से हुई थी शुरूआत
शांतिकुंज हरिद्वार में राजस्थान जोन के प्रभारी जयसिंह यादव ने बताया कि वर्ष 1992 में जयपुर से अश्वमेध महायज्ञ की श्रृंखला का शुभारंभ हुआ था। आश्वमेधिक अनुष्ठान का यह 49वां महायज्ञ है। इस महायज्ञ से जन मानस को आध्यात्मिक आहार मिलेगा। भारतीय संस्कृति के मानदण्डों के अनुरूप अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के सारी गतिविधियां संचालित होंगी। इस यज्ञ के पीछे गायत्री परिवार का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र के विकास के साथ-साथ संपूर्ण मानव जाति के उत्थान का है।