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क्विज से बच्चों का आंकलन बना शिक्षकों के लिए सिरदर्द

अपना काम करें या बच्चों से क्विज सॉल्व करवाएं

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jul 16, 2021

क्विज से बच्चों का आंकलन बना शिक्षकों के लिए सिरदर्द

क्विज से बच्चों का आंकलन बना शिक्षकों के लिए सिरदर्द



जयपुर, 15 जुलाई
राज्य सरकार ने अभी स्कूल खोले जाने को लेकर कोई निर्णय नहीं किया है लेकिन बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि स्कूल नहीं शुरू होने तक बच्चों का आंकलन क्विज के जरिए किया जाए। विभाग के यह निर्देश स्कूल शिक्षकों के लिए परेशानी बन गए हैं और अब इन आदेशों का विरोध भी शुरू हो गया है।
अपना काम करें या बच्चों का करवाएं
विभाग के निर्देश हैं कि जिन बच्चों या उनके अभिभावकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं हैं उनकी मदद शिक्षकों को करनी होगी। शिक्षक अपने मोबाइल से उनकी पढ़ाई में मदद करें। विभाग के निर्देश शिक्षकों के लिए सिरदर्द बन गया है। वजह है कि शिक्षकों को मिले हुए अन्य दायित्व।
शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षण कार्य, गृह कार्य वितरण और संकलन करने का कार्य, पोषाहार योजना में खाद्यान्न और कॉम्बो पैक के वितरण का कार्य करना होता है। साथ ही नामांकन बढ़ाने,डाक भेजने,प्रतिदिन बालकों व अभिभावकों को कॉलिंग करने, छात्र के गृहकार्य की ऑनलाइन मैपिंग करने,विद्यालय के अन्य समस्त कार्यो को ऑनलाइन करने आदि का काम भी है। ऐसे में उन्हें बच्चों की क्षमता का आंकलन क्विज के जरिए किए जाने की जिम्मेदारी भी गई है।
बच्चों के पास नहीं एंड्राय्ॉड मोबाइल
परेशानी यह है कि अधिकांश बच्चों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है, ऐसे में क्विज सॉल्व करवाने के लिए यदि शिक्षक अपना मोबाइल बच्चों को देते हैं तो खुद शिक्षक का काम इससे प्रभावित होता है। जिन अभिभावकों के पास एंड्राय्ॉड मोबाइल है वह इसे अपने साथ काम पर ले जाते हैं। सभी अभिभावकों के लिए संभव नहीं कि वह हर बच्चे को अलग मोबाइल दिलवा सके। उस पर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा नहीं होने, सर्वर डाउन होने, बिजली कटौती रहने से मोबाइज चार्जिंग, प्रिंटिंग और फोटोकॉपी करने की समस्या बनी रहती है। ऐसे में अब शिक्षक मांग कर रहे हैं क्विज के जरिए बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता का आकलन बंद करवाया जाना चाहिए।
स्कूलों में नहीं सुविधाएं
क्विज में चित्रात्मक प्रश्नों के साथ उत्तर के ऑप्शन विकल्पात्मक दिए गए हैं। ऐसे में शिक्षक के लिए जरूरी होता है कि बच्चों को इसकी कलर फोटोकॉपी ही दी जाए। यह काम भी शिक्षक को करना होता है । पहले क्विज शीट की कलर्ड फोटोकॉपी निकाली जाए फिर उसे अपने मोबाइल से साल्व करवाए, इसमें शिक्षक के पैसे और समय का नुकसान हो रहा है क्योंकि स्कूलों में कलर्ड फोटो कॉपी मशीन, बिजली जनरेटर का भी अभाव है। क्विज आंकलन प्रश्नपत्रों के लिए एक माह के 4 सप्ताह में 4 बार कम्प्यूटर प्रिंट और हर बच्चे के लिए उसकी अलग रंगीन फोटो कॉपी निकलवानी होती है जिसके लिए स्कूलों को बजट कम पड़ रहा है।
शिक्षकों की भी है कमी
स्कूलों में अब तक निशुल्क पाठ्यपुस्तिका और कार्य पुस्तिका नहीं पहुंची हैं। राज्य में कई उप्रावि में 8 कक्षाओं के लिए मात्र 4 शिक्षक या इससे कम शिक्षक हैं, प्राथमिक विद्यालयों में 5 तक की कक्षाओं के लिए 1से 2 शिक्षक कार्यरत हैं। कक्षा 1 से 5 के लिए 18 शिक्षण विषय तथा कक्षा 6 से 8 के भी 18 विषयों के लिए क्विज करवाना तथा मावि व उमावि में बड़ी संख्या में बालकों के लिए क्विज आंकलन को अल्प शिक्षकों के सहारे ऑनलाइन व ऑफलाइन करवाना अव्यवहारिक है।
इस क्विज में प्रति सप्ताह दो विषय के 16 प्रश्नों को पढ़कर समझकर उत्तर देने होते हैं। अगर नेट व सर्वर सही काम करे तो इन 16 प्रश्नों को हल करने में हर बच्चे को 30 मिनट लगते है। ऐसे में 50 बच्चों को कम से कम 1500 मिनट यानी 25 घंटों की आवश्यकता होगी। यदि शिक्षक बिना प्रिंट दिए ऑफलाइन उनके घर जाकर अपने मोबाइल से इसे सॉल्व करवाता है तो 6 घंटों के एक कार्य दिवस में प्रति सप्ताह उसे 4 दिन यह कार्य करना पड़ेगा। शेष रहे दो दिनों में गृहकार्य, वितरण,संकलन,जांच,कार्यंपत्रक को पोर्टफोलियो में लगाने ,अगले कार्य पत्रक को तैयार करने ,पोषाहार व कॉम्बो पैक वितरण इत्यादि कार्य करने होंगे।
संगठन ने की मांग
राजस्थान शिक्षक संगठन राष्ट्रीय ने मांग की है कि जिन बच्चों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं उनका आंकलन क्विज से नहीं हो। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सम्पत सिंह का कहना है कि क्विज के प्रश्नपत्र की फोटोकॉपी के लिए हर बच्चे पर न्यूनतम 50 रुपए के हिसाब से 50 हजार रुपए का अतिरिक्त बजट जारी करवाया जाए।
स्कूलों में शिक्षकों की अतिरिक्त व्यवस्था हो।
स्कूली विद्यार्थियों को एंड्रॉयड मोबाइल सिम और नेट पैक भरवाने की सुविधा दी जाए।
स्कूलों में बिजली कनेक्शन,जनरेटर व बड़ी रंगीन फोटो कॉपी मशीन, कागज, इत्यादि उपलब्ध करवाए जाएं।