
तकनीकी युग में स्मृति को संजोए रखने की आवश्यकता-देवदत्त पटनायक
आज हम तकनीकी युग में जी रहे हैं, जहां स्मृति को संजोए रखने की सख्त आवश्यकता है और ऐसे में संग्रहालयों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। पहले किसी भी वस्तु के तीन पहलू होते थे - सत्यम (कार्य), शिवम (कहानी, जो इसे शुभ बनती है) और सुंदरम (सौंदर्य) लेकिन अब हम वस्तु को विशेष बनाने वाली कहानी व आख्यान से दूर हो रहे हैं और केवल उसके कार्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों से तुलना की जाए तो भारत में संग्रहालयों को इतना महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, क्योंकि लोग अतीत में रहना शुभ नहीं मानते हैं। जयपुर के एक संग्रहालय में ‘book 'The Adornment of Gods' के विमोचन के अवसर पर यह कहना था Author Devdutt Patnaik का। वे म्यूजियम कंसल्टिंग कंपनी- एका कल्चरल रिसोर्सेज एंड रिसर्च के प्रबंध निदेशक, प्रमोद कुमार केजी के साथ बातचीत कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने म्यूजियम के फाउंडर, राजीव अरोड़ा और राजेश अजमेरा के साथ औपचारिक रूप से अपनी इस पुस्तक का विमोचन किया।
देवदत्त पटनायक की पुस्तक 'द एडोर्नमेंट ऑफ गॉड्स' भारत की पौराणिक कथाओं और उनकी रत्नजड़ित कलाओं के बीच गहरे संबंधों के बारे में बताती है। पुस्तक में लेखक देवदत्त पटनायक ने म्यूजियम के संग्रह की पचास बेहतरीन कला वस्तुओं और उनसे जुड़ी कहानियों पर प्रकाश डाला है। प्रतीकों के महत्व की बात करते हुए पटनायक ने कहा कि प्रतीक वह माध्यम हैं, जिनके जरिए विचार आम आदमी तक पहुंच पाते हैं। यह उन लोगों को विचार का संचार करने में मदद करते हैं, जो आपकी भाषा नहीं जानते हैं, क्योंकि प्रतीकों में भौगोलिक क्षेत्रों में यात्रा करने की शक्ति होती है।
Published on:
16 Apr 2023 12:07 am
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