
Mukundra Hills Tiger Reserve file photo
कोटा. Mukundra Hills Tiger Reserve में बाघिन की मौत के साथ जन्म से पहले तीन शावकों को भी खो दिया। बाघिन तीन शावकों को जन्म देने वाली थी। जानकारी के अनुसार, बाघिन बीमार नहीं होती तो सप्ताह भर में शावकों के जन्म की खुशी मिलती। पोस्टमार्टम में सामने आया कि बाघिन की मौत बच्चेदानी के फटने से हुई। चिकित्सकों के अनुसार पोस्टमार्टम में सामने आया कि बाघिन 3 शावकों को जन्म देने वाली थी। इनमें से एक शावक बच्चेदानी फटने से पेट में आकर गल गया। बच्चेदानी का पानी भी पेट में भर गया था। दूसरा बच्चा यूट्रस में फंसा नजर आया। वह भी आधा सड़ चुका था। एक अन्य बच्चा बच्चेदानी के दूसरे भाग में नजर आया। चिकित्सकों के अनुसार, हो सकता है कि शिकार के दौरान बाघिन को चोट लगने से बच्चेदानी फट गई हो। गत दिनों शिकार के बाद बाघिन का मूवमेंट नहीं हो रहा था। उपवन संरक्षक बीजो जॉय के अनुसार, पोस्टमार्टम में बाघिन की आंतों में ब्लॉकेज व गर्भाशय में रैप्चर पाया गया, जिसके शॉक को मौत का प्रारंभिक कारण माना गया।
पूर्व में भी बनी थी मां
बाघिन एमटी-4 पहले भी मां बनी थी। उसने बाघ एमटी-3 के साथ रहते हुए शावकों को जन्म दिया था, लेकिन शावक सामने नहीं आए थे। हालांकि बाघिन की एक फोटो वायरल हुई थी, जिसमें एक शावक को ले जाती हुई नजर आई थी।
नहीं मिला संतान सुख
बाघिन कृष्णा व बाघ स्टारमेल की बेटी बाघिन एमटी-4 करीब 9 साल की थी। मुकुन्दरा में शिफ्टिंग से पहले बाघिन ने रणथंभौर में भी मेल पार्टनर टी-95 के साथ दो शावकों को जन्म दिया था, लेकिन चार माह के बाद उनकी मौत हो गई।
मलद्वार आ गया था बाहर
क्षेत्रीय निदेशक एसपी सिंह ने बताया कि बाघिन 30 अप्रेल से बीमार चल रही थी। बाघिन को मल त्यागने में समस्या आ रही थी। 1 मई को बाघिन को ट्रंकोलाइज कर इलाज कर मल के 2 टुकड़े निकाले गए थे। 3 मई को मॉनिटरिंग के दौरान बाघिन के मलाशय बाहर दिखा। बाघिन को ट्रंकोलाइज कर वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा बाघिन का उपचार किया गया । इस दौरान भी मल के टुकड़ों को बाहर निकाला गया। उपचार के लगभग दो घण्टे बाद बाघिन ने तीन गहरी सांसें ली और दोपहर 1:15 बजे दम तोड़ दिया। बीमारी के चलते बाघिन को तीन दिन में 2 बार ट्रंकोलाइज करना पड़ा।
पोस्टमार्टम कर किया अंतिम संस्कार
बाघिन को शाम पांच बजे करीब दरा रेंज कार्यालय पर लाया गया, जहां मुकन्दरा रिजर्व व रणथंभौर टाईगर रिजर्व के चिकित्सकों तेजेंद्र सिंह, राजीव गर्ग, अरविंद माथुर, विशाल नैनीवाल की टीम ने पोस्टमार्टम किया। उसके बाद अंतिम संस्कार किया गया। क्षेत्रीय निदेशक एसपी सिंह, उपवन संरक्षक संजीव शर्मा, डीएफओ बीजो जॉय, उपखण्ड अधिकारी कनवास, मोड़क थानाधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मीणा मौजूद रहे।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व
9 अप्रेल 2013 में मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। पांच वर्ष के लंबे इंतजार के बाद 2018 में पहला बाघ छोड़ा गया।
3 अप्रेल 2018 को टाइगर री-इंट्रोडक्शन प्लान के तहत रणथंभौर से रामगढ़ में आए बाघ टी-91 को मुकुन्दरा में छोड़ा गया था। इसे एमटी-1 नाम दिया गया।
19 दिसम्बर 2018 को रणथंभौर से बाघिन टी-106 को लाकर मुकुन्दरा में छोड़ा। इसे एमटी-2 नाम मिला, इसने दो शावकों को जन्म दिया।
9 फरवरी 2019 को रणथंभौर से निकला बाघ टी-98 मुकुन्दरा में कैमरा ट्रेप हुआ। यह सुल्तानपुर के रास्ते कालीसिंध के नेचुरल कोरिडोर से होते हुए मुकुन्दरा के घाटी माता मंदिर क्षेत्र पहुंचा। इसे एमटी-3 नाम दिया।
12 अप्रेल 2019 को बाघिन टी-83 को रणथंभौर से ट्रांसलोकेट कर मुकुन्दरा लाए। इसे एमटी-4 नाम दिया। इसके शावकों की पुष्टि विभागीय तौर पर नहीं हो सकी थी।
जून-2020 के प्रारंभ में बाघिन एमटी-2 के दो शावक सामने आए और टाइगर रिजर्व में बाघ परिवार के सदस्यों की संख्या 6 हो गई।
3 अप्रेल 2018 को पहले बाघ के आने के करीब दो साल तक टाइगर रिजर्व में खुशियों की बयार चलती गई, लेकिन बाघ एमटी-3 की मौत के बाद टाइगर रिजर्व की ऐसी बदहाली हुई की दो साल तकर टाइगर रिजर्व में सन्नाटा छाया रहा।
23 जुलाई 2020 को बाघिन एमटी-4 का जोड़ीदार बाघ एमटी-3 मृत अवस्था में पाया गया। इसका इलाज चल रहा था और टाइगर रिजर्व में टीम इसे ट्रेंकोलाइज करने आई थी, लेकिन इसी दौरान यह मृत अवस्था में मिला और टाइगर रिजर्व में बाघिन की जोड़ी टूट गई व शावक समेत 6 में से पांच बाघ रह गए।
3 अगस्त 2020 को 82 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में बाघ एमटी-1 की जोड़ीदार बाघिन एमटी-2 की मौत हो गई। इसका एक से दो दिन पुराना शव 3 अगस्त टाइगर रिजर्व में देखा गया था। इसकी मौत का कारण बाघ से आपसी झंगड़ा बताया गया।
बाघिन एमटी-2 की मौत के करीब एक माह पहले ही इसके दो शावक सामने आए थे, इनमें से एक शावक की इलाज के दौरान कोटा के 18 अगस्त को चिड़ियाघर में मौत हो गई थी। एक शावक को विभाग की टीम खोज नहीं पाई। बाघिन एमटी- 2 की मौत के कुछ दिन इसका का जोड़ीदार एमटी-1 भी लापता हो गया। जिसका पता नहीं चल सका। अब बाघिन एमटी-4 की भी मौत हो गई।
पांच साल में खो दिए 4 बाघ, दो शावक,पहला बाघ हो गया था गुम, शेष की मौत
कोटा . मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघिन लाइटनिंग की मौत से पर्यटन के सूरज पर फिर अंधेरा छा गया। एक के बाद एक बाघों की मौत विभागीय प्रशासन व मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व को बने एक दशक पुरा हो गया, लेकिन पर्यटक व वन्यजीव प्रेमी टाइगर रिजर्व के बाघों को नहीं देख पाए। इसकी विपरीत लगातार एक एक बाद एक बाघों को खोते चले गए। टाइगर रिजर्व बनने के 5 साल बाद वर्ष 2018 में रामगढ़ क्षेत्र से बाघ को लाकर मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। एक ही साल में अप्रेल 2019 तक टाइगर रिजर्व में दो बाघ व दो बाघिन हो गईं। प्रारंभिक दौर में बनी इन जोड़ियों में से पहला बाघ एमटी-1 लापता हो गया, एक बाघ व एक बाघिन की मौत हो गई। इन चार बाघों में से बाघिन एमटी-4 बची थी, इसकी भी गुरुवार को झामरा क्षेत्र में इलाज के दौरान मौत होई। बाघों की इन जोड़ियों के अलावा बाघिन एमटी-2 के एक शावक की भी मौत हो गई थी। एक शावक गुम हो गया था।
फिर टूट गई जोड़ी
रिजर्व में दो साल तक बाघिन एमटी-4 अकेली थी। 3 नवम्बर 2022 को रणथंभौर से बाघ टी-110 को लाकर बाघिन एमटी-4 के जोड़ीदार के रूप में छोड़ा गया था। गत दिनों से बाघ- बाघिन की जोड़ी को जंगल में साथ विचरण करते हुए देखा गया था, लेकिन करीब 6 माह के साथ के बाद अब बाघ एमटी-5 अकेला रहा गया।
बाघिन की मौत से वन्यजीव प्रेमियों में निराशा
कोटा. बाघिन की मौत से वन्यजीव प्रेमियों में निराशा है। पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही शहर की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि टाइगर रिजर्व में लंबे इंतजार के बाद शावकों के जन्म व एक और बाघिन के आने का इंतजार था, लेकिन इससे पहले ही बाघिन की मौत हो गई, जो निराशादायक है। जानकारों के अनुसार अब बाघ को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जल्द ही रिजर्व में बाघिन को लाया जाना चाहिए।
विभाग को दोष नहीं दे सकते, लेकिन इतना कह सकते हैं कि बाघ-बाघिन का रेशो 1-2 का रखना चाहिए। हमारे यहां शुरू से ही यह रेशो 1-1 का रहा है। अब भी वक्त है, यहां जल्द ही दो बाघिनों को शिफ्ट किया जाए। एक बाघिन की अनुमति मिल चुकी है।
तपेश्वर सिंह भाटी, पूर्व सदस्य, लोकल एडवाइजरी समिति, एमएचटीआर
बाघिन की मौत दुख का विषय है। पूर्व में भी एक बाघ व बाघिन की मौत हो चुकी है। तीसरी मौत से वन्यजीव प्रेमी निराश हैं। इससे पर्यटन की दृष्टि से भी झटका लगा है। यह विभागीय प्रशासन की विफलता है।
निखलेश सेठी, कन्वीनर, इंटेक
बाघिन की मौत टाइगर रिजर्व के लिए एक बड़ा धक्का है। वन विभाग की टीम ने पशु चिकित्सकों के साथ बाघिन को बचाने के प्रयासों में कमी नहीं रखी, लेकिन पूर्व में भी यहां बाघों की मौत हो चुकी है, जो चिंताजनक है।
बृजेश विजयर्गीय, संयोजक बाघ-चीता मित्र
पूर्व में हुई बाघों की मौत को देखते हुए यह विषय अधिक सतर्कता व संवेदनशीलता से देखा जाना आवश्यक था। मुकुंदरा को आबाद करने में खून, पसीना और आंसू निकले, और जब लग रहा था कि ठीक चल रहा है, उसी समय बाघिन की मौत की सूचना मिली, जिसने बड़ा सदमा दिया।
देवव्रत हाड़ा, संयोजक, पगमार्ग फाउंडेशन
हर कोई मुकुन्दरा में पर्यटन का इंतजार कर रहा है। ऐसे में इस तरह की घटना पीड़ादायक है। विभागीय प्रशासन को अधिक सतर्कता बरतनी होगी।
एएच जैदी, नेचर प्रोमोटर
मुकुन्दरा हिल्स में बाघिन की मृत्यु एक घटना है, लेकिन अब बाघ के लिए अन्य बाघिन को जल्द लाने की आवश्यकता है। जल्द बाघिन को नहीं लाया गया तो बाघ स्ट्रेस में आ जाएगा। पूर्व में भी यहां बाघ की शिफ्टिंग में देरी हुई है। जो बाघ नवम्बर में लाया गया, पहले ही लाया जाता तो यह मुश्किल नहीं आती। अब जबकि एनटीसीए की ओर से एक बाघिन को मुकुन्दरा हिल्स में शिफ्ट करने की स्वीकृति मिल गई है, तो इसमें अब देरी नहीं की जानी चाहिए। टाइगर रिजर्व में कोई कमी नहीं है।
दौलत सिंह शक्तावत, मेंबर, स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड
Published on:
05 May 2023 05:18 pm

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