24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बेटी बचाने का संदेश पहुंचा सरहद तक

रेवड़ चराते बालकों के मां-बाप को उन्हें पढ़ाने के लिए समझाया, बालकों को बताया गया कि फौजी बनने के लिए पढ़ाई करना जरूरी है। इसके बाद बाइक की सैर करवाई, तो उनके मुंह से निकला यो फटफटियो, तो ऊंटां स भी तेज भागै है।

2 min read
Google source verification

image

Sangeeta Chaturvedi

Feb 10, 2015


रेवड़ चराते बालकों के मां-बाप को उन्हें पढ़ाने के लिए समझाया, बालकों को बताया गया कि फौजी बनने के लिए पढ़ाई करना जरूरी है। इसके बाद बाइक की सैर करवाई, तो उनके मुंह से निकला यो फटफटियो, तो ऊंटां स भी तेज भागै है।


आर्मी बैटल एक्स, राजस्थान पत्रिका व हीरो की ओर से बेटी बचाने के संदेश के साथ निकाली जा रही बाइक डेजर्ट सफारी अब सुदूर इलाके के गांव व ढाणियों में पहुंच चुकी है, जहां रेवड़ चराना ही एकमात्र धंधा है। इन गावों में कोई न कोई प्राइवेट और न ही सरकारी नौकरी करता है।


उदयपुर से शुरू होकर पश्चिमी सरहद पर स्थित गांव-ढाणियों में संदेश देने के लिए निकाली जा रही

1600 किलोमीटर की यात्रा में जवान बिना थके आगे बढ़ रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ऑफिशियल मीडिया पार्टनर है, जो यात्रा में साथ रहते हुए जवानों की संदेश यात्रा की मेहनत व उन गांवों के हालात से रूबरू करवा रहा है। ये वे बॉर्डर के गांव हैं, जहां से अंतरराष्ट्रीय सीमा कहीं दस तो कहीं बीस किलोमीटर की दूरी पर है।


पचास किमी की दूरी पर गांव

जैसलमेर जिले के बॉर्डर के ये गांव तीस से पचास किलोमीटर में फैले हुए हैं। सेना के जवान जब यहां के लिए निकलते हैं, तो दस-दस किलोमीटर तक कोई


ढाणी भी नहीं नजर आती। बाइक सफारी में इन जवानों को देख गांव वाले भय मिश्रित कौतुहल से देखते हैं। जब जवानों की यात्रा का मकसद पता चलता है, तो वे स्वागत कर खाने-पीने की भी मनुहार करते हैं। हालांकि उनके झोंपड़े गरीबी की ओर इशारा करते हैं।


लगाया मेडिकल कैम्प

बॉर्डर से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव में मेडिकल कैम्प भी लगाया गया। यह गांव की पूरी आबादी मुस्लिम है। यहां के बड़ी संख्या में लोग नशा करते हैं। हर दूसरे बुजुर्ग को दमा की बीमारी है। इसके अलावा भारी पानी होने की वजह से आबादी के सभी लोग घुटनों में दर्द की भी शिकायत करते हैं।