
जयपुर / भीलवाड़ा। फिल्म पद्मावती में इतिहास को तोड़मरोड कर फिल्माने के आरोप को लेकर पेश परिवाद पर निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली सहित सात अन्य कलाकारों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट पश्चिम भीलवाड़ा की अदालत ने गुरुवार को अपराधिक अभियोग दर्ज कर लिया। वहीं जयपुर में एसीएमएम-16 कोर्ट में पेश किए गए परिवाद को गुरुवार को कोर्ट ने स्वीकार कर मामले की स्वयं जांच करने का फैसला लिया।
पद्मिनी कल्पना नहीं
भीलवाडा में ये अभियोग 15 नवम्बर को पेश किया था। इसमें फिल्मकार भंसाली, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण , शाहिद कपूर , रणवीर कपूर सहित सात अन्य आरोपितों के खिलाफ प्रस्तुत अभियोग पत्र में बताया कि आरोपितों द्वारा यह जानते हुए कि चित्तौडग़ढ़ की महारानी वीरांगना पद्मिनी कल्पना नहीं होकर जीवन्त की अनन्य घटना है। इसके बावजूद उन्होंने आपराधिक षड्यन्त्र पूर्वक भारतीय हिन्दू समाज की गौरवशाली वीरांगना पद्मिनी की ऐतिहासिक घटनाओं को तोड़ मरोड़ व कांट छांट कर इतिहास व हकीकत की घटनाओं से परे जाकर फिल्म में दृश्य दिखाए हैं।
परिवाद में अभियोगियों ने न्यायालय से आरोपितों के खिलाफ उनके द्वारा किए गए आपराधिक कृत्य के मामले में कठोर कार्रवाई कर सजा दिलाने की गुहार की है। इस परिवाद को दर्ज करने के लिए न्यायालय ने गुरुवार को सुनवाई की और अपराधिक प्रकरण दर्ज कर 14 दिसम्बर 2017 तय की।
एफआईआर की अपील ठुकराई
जयपुर में एसीएमएम-16 कोर्ट में पेश किए गए परिवाद फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण समेत 11 लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अपील की थी। कोर्ट में जज श्वेता ढाका ने परिवाद को स्वीकार कर लिया और मामले की स्वयं जांच करने का फैसला लिया। साथ ही परिवादी की एफआईआर दर्ज करने की अपील को ठुकरा दिया। इस मामले में 27 नवम्बर को कोर्ट में परिवादी के बयान होंगे और जरूरत पडऩे पर जांच को पुलिस के पास भेजने की बात कही।
Published on:
23 Nov 2017, 8:07 PM IST
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