भारतीय मजदूर संघ व विद्युत श्रमिक संघ के अधिवेशन में रविवार को कर्मचारी नेता और विधायकों में जमकर भाषणों के तीर चले। कर्मचारियों ने जहां निजीकरण और पीपीपी मॉडल के निर्णय को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा तो विधायकों ने कहा कि कर्मचारी ईमानदारी से काम करें तो यह नौबत ही क्यों आए।
सांवली रोड स्थित आदर्श विद्या मंदिर में हुए अधिवेशन में कर्मचारी नेताओं ने संगठन के दम पर सरकार को निर्णय बदलने के लिए मजबूर करने का आह्वान किया। अधिवेशन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री दीनानाथ रूंथला ने कहा कि राज्य सरकार का श्रमिक कानून सुधार बिल मजदूर विरोधी है।
उन्होंने कहा कि इस एक्ट के नए संशोधन कर्मचारियों का गला घोंटने वाले और धन्नासेठ व ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने वाले है। रूंथला ने कहा कि जन सुविधाओं को भी पीपीपी मॉडल पर देने से सुविधा तो दूर उल्टे लोगों की मुसीबतें बढ़ेंगी।
सरकारी फरमान घाटे के लिए जिम्मेदार: गुर्जर
भारतीय मजदूर संघ के विद्युत मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हजारीलाल गुर्जर ने कहा कि सरकारी सिस्टम और फरमान घाटे के लिए जिम्मेदारी है। बिजली कंपनियों के गठन के समय काफी कम घाटा था। लेकिन जितना घाटा 60 वर्ष में नहीं हुआ उतना सरकारों ने पिछले 15 वर्ष में बढ़ा दिया। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि एक जनप्रतिनिधि को बिजली चोरी करते हुए पकड़ा तो उनका तबादला कोटा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं।
एसके अस्पताल के हालात देख लो: वर्मा
धोद विधायक गोरधन वर्मा ने कहा कि 95 फीसदी कर्मचारी अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं। एसके अस्पताल का उदाहरण देते कहा कि अस्पताल में कितने संसाधन और कितना स्टाफ है। इसके बाद भी निजी अस्पताल आगे हैं। सरकारी संस्थाओं को घाटे से उबारने के लिए हम सभी को मिल जुलकर प्रयास करने होंगे।
दूसरा पक्ष भी देखो: दाधीच
भाजपा के प्रदेश मंत्री मुकेश दाधीच ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ और भाजपा के बीच परिवार का रिश्ता है। प्रधानमंत्री ने जनधन व अटल पेंशन योजना गरीबों के लिए शुरू की है।
भाजपा ने राजस्थान में हर बार संविदा कर्मियों को नियमित किया है। इसके बाद भी कर्मचारी संगठन सरकार की एकपक्षीय बात कर रहे हैं। राज्य सरकार कर्मचारी और जनता हित में ही कोई फैसला लेगी।