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विशाल सूर्यकान्त की रिपोर्ट...
शाम करीब छह बजे का वक्त, सड़कों पर अस्त-व्यस्त ट्रैफिक से चिल्ल-पौं मची हुई है। मैं अजमेर में सुभाष उद्यान के बाहर तांगे वालों के बीच हूं। अब तांगे सिमट गए है। अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने की पहली गाज, इन तांगे वालों पर ही गिरी है। सियासी मिजाज परखने निकला तो नजर तांगे पर बैठे मुरली पर पड़ी। चुनावी चर्चा छेड़ी तो मुरली बोला, साहब पता नहीं कब तांगे बंद हो जाएं? निगम वाले कहते हैं घोड़े गंदगी फैलाते हैं, ट्रैफिक भी बिगाड़ते हैं। मुरली अपने मोहल्ले के कहने पर फूल वाली पार्टी पर बटन दबाते हैं। पहले वो हाथ को वोट देखते थे। इस बार चुनावों का मुद्दा पूछा तो पास ही ई-रिक्शा लिए खड़े शंकर ने कह दिया पेट्रोल-डीजल का भाव।
अजमेर बस स्टैंड पर कुछ युवा मिले । ये नागौर और आस-पास के हैं, पढ़ाई के लिए अजमेर रह रहे हैं। इन्हें लगता है कि इस बार अजमेर में कांटे की टक्कर रहेगी। वैसे नागौर का सूरजभान बात को तीसरा मोर्चा और हनुमान बेनीवाल पर लाता दिखा। रात के 12 बजे मैं बस स्टैंड के करीब मुन्ना टी स्टॉल पर बैठे युवाओं के बीच हूं। मुन्ना चाय वाला मोदी का मुरीद है। लेकिन शकील ट्रिपल तलाक को तूल दिए जाने से कुछ नाराज दिखे।
शकील बोला-सब धर्म में कुछ गलत रवायत शुरु हो जाती है। एक दूसरे की गलती निकालने के बजाए अपना-अपना घर साफ करो तो शहर और समाज अपने आप साफ हो जाएगा। बीजेपी में कुछ लोग जानबूझ कर ये मामला उठाते हैं, सरकार रोकती भी नहीं। मुस्लिम महिलाएं भी जानती है कि कौन सही है,कौन गलत। राजस्थान में ट्रिपल तलाक के इतने मामले भी नहीं होते। बस राजनीति नहीं होनी चाहिए। धर्मपाल इससे सहमत नहीं,वो कहते हैं कि सती प्रथा भी तो बंद हुई। दहेज प्रथा पर भी सख्त कानून बने। बात स्वच्छता अभियान तक भी पहुंची।
एक ओर पुष्कर और दूसरी ओर ख्वाजा की दरगाह। ये सैलानियों की आमद का जरिया है लेकिन सियासतदां फूंक-फूंक कर कदम रखते आए हैं। गौरव यात्रा के समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आए लेकिन न ख्वाजा की दरगाह पर गए और न ही ब्रह्मा मंदिर और न पुष्कर सरोवर। अजमेर में रहकर कंपीटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे संतोष कुमार राजनीतिक माहौल पर खासे सक्रिय हैं। वह कहते हैं कि अजमेर और आस-पास की सीटें बीजेपी के लिए चुनौती हैं।
हाल के उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ.रघु शर्मा ने जीत हासिल कर भाजपा को सोचने पर मजबूर कर रखा है। गौरव यात्रा का समापन यहीं पर कर बीजेपी ने अजमेर को महत्व देने की कोशिश की है। मगर मंत्रियों की तनातनी पूरे पांच साल चलती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट अजमेर से सांसद रहे हैं।
अजमेर जिले में 8 विधानसभा सीटें हैं। पुष्कर, किशनगढ़ सीटों पर दावेदारों में घमासान है। कांग्रेस और बीजेपी में आला नेताओं की खेमेबंदी सतह पर है। अभी आठ सीटों में से सात सीटें बीजेपी के खाते में है। लेकिन लोकसभा उप चुनाव की हार के बाद भाजपा खासी सक्रिय है। टिकट वितरण के बाद दोनों ही राजनीतिक दलों के समीकरण फिर से बनेंगे और बिखरेंगे।
जिले का समीकरण
कुल आठ विधानसभा सीट हैं: किशनगढ़, पुष्कर, अजमेर उत्तर, अजमेर दक्षिण, ब्यावर, केकड़ी, मसूदा व नसीराबाद
इनमें सात सीटें सामान्य वर्ग की हैं। एक सीट अजमेर दक्षिण एससी के लिए आरक्षित है
2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सभी आठ सीटों पर जीती
नसीराबाद उपचुनाव में कांग्रेस चुनाव जीती
Published on:
19 Oct 2018 08:30 am
