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ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर टेंशन में भाजपा, शेखावत ने दी सफाई

शेखावत ने कहा केन्द्र सरकार ने बनाई है उच्च स्तरीय समिति
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ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर टेंशन में भाजपा, शेखावत ने दी सफाई

ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर टेंशन में भाजपा, शेखावत ने दी सफाई


ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर भाजपा के संकल्प पत्र में किसी तरह की आश्वासन नहीं दिया है, वहीं कांग्रेस इसे गारंटी के रूप में भुना रही है। अब केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर में एक बयान में शनिवार को स्पष्ट किया कि केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने पेंशन स्कीम्स को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जो पूरे भारत के परिप्रेक्ष्य में विचार कर रही है। मैं केन्द्र सरकार की तरफ से विश्वास के साथ कह सकता हूं कि किसी भी कर्मचारी के हितों पर एनपीएस के चलते कुठाराघात नहीं होगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सी.पी.जोशी के साथ पत्रकारों से बातचीत में केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर हुए सवालों पर कहा कि ओपीएस पर यदि अशोक गहलोत को उनको कानून बनाना होता तो मेरा प्रश्न यह है कि जिस ओपीएस को उन्होंने 4 साल पहले घोषित किया था। गाजे-बाजे के साथ में घोषितकर चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में लेकर के आए थे। दोनों जगह देने से मुकर चुके हैं। यहां 4 साल बाद अब उनको कानून बनाएंगे, ऐसा स्मरण आया है। मुझे लगता है कि प्रश्न उनसे पूछा जाना चाहिए कि अब तक कानून बना क्यों नहीं पाए थे?

भाजपा के ओपीएस पर स्टैंड के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्टैंड एकदम साफ है। ओपीएस को लेकर जिस तरह की चर्चा और चिंता लोगों के बीच में आई है। कहीं कोई विसंगतियां कैसे हो सकती हैं, क्योंकि जो लोग वर्ष 2014 में नौकरी में आए थे। अभी तक उसमें से लोग रिटायर होना शुरू नहीं हुए हैं। उनकी पेंशनेबल उम्र अभी नहीं हुई है। राजस्थान में वर्ष 2014 के बाद में एक सरकारी योजना में प्राइवेट स्कूल में काम आने वाले टीचर्स समायोजित हुए थे। अब उनके समायोजन के कारण से उनकी पेंशनेबल उम्र नहीं थी। उनके समायोजन के समय ही लिखा गया था कि वो किसी तरह के पेंशन लाभ के हकदार नहीं होंगे। उनका केवल रिटायरमेंट हुआ। उनके केवल ग्रेच्युटी पेपर्स को दिखाकर ऐसा वायुमंडल बनाया गया कि कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। अभी तक पेंशनेबल उम्र किसी की नहीं हुई। 20 साल की नौकरी तो वर्ष 2034 में होगी, उसके बाद ही पेंशन मिलेगी, लेकिन ऐसी संभावित कोई भी विपरीत परिस्थिति किसी कर्मचारी के साथ में कभी हो सकती है, इसको कवरअप करने के लिए केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जो इस पर पूरे भारत के परिपेक्ष्य में विचार कर रही हैं। किसी भी कर्मचारी के हितों पर एनपीएस के चलते विपरीत कुठाराघात नहीं होगा। इसको भारत सरकार आश्वस्त करती है।