
चना व दाल पर पिछले दो माह से जमाखोरों ने अपनी नजर गड़ा रखी है वे इसका स्टॉक कर रहे है अकेले बीकानेर में इसकी दस लाख बोरियों का स्टॉक यहां के वेयर हाउस गोदामों में किया जा चुका है।
इस जमा प्रवृति से स्थानीय व्यापारियों के साथ-साथ देशी-विदेशी कम्पनियां भी अपना भाग्य अजमां रही है। जानकारों की मानें तो दो माह पहले चने की कीमत प्रति क्विंटल 3 हजार रूपए थी
लेकिन वर्तमान में इसकी कीमत बढ़कर 42 सौ रूपए प्रति क्विंटल हो गई है। असल में चने के स्टॉक पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। चने की स्टॉक सीमा नहीं होने से इसके जमाखोर सक्रिय है।
अच्छी पैदावार के बावजूद इसकी कीमत बढऩे का कारण जमाखोरी को माना जा रहा है। चना दाल की बढ़ती कीमतों के चलते चना दाल से जुड़ी कई इकाईयां भी प्रभावित हुई है।
थाली से दूर हुई दाल
जमाखोरी के चलते गरीब की दाल कही जाने वाली चना दाल थाली से दूर होती जा रही है। खुदरा कीमतों पर नजर डाले तो दो माह पूर्व चना दाल 45 से 50 रूपए प्रति किलो बिक रही थी
लेकिन वर्तमान में इसकी कीमत 60 रूपए प्रति किलो पहुंच चुकी है। चना दाल से बनने वाले बेसन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है यह दो माह पहले 45 रूपए प्रति किलो बिका करता था
लेकिन वर्तमान में 62 से 65 रूपए प्रति किलो के आंकडे छू लिया है।

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