
Jaipur News : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पृथ्वी, जीव और पर्यावरण कल्याण ही रामराज्य की कल्पना है। उन्होंने मानव विकास के लिए प्रकृति से सामंजस्य और संतुलन को आवश्यक बताया, वहीं जीव-जन्तुओं की कई प्रजातियां लुप्त होने पर चिंता जाहिर की।
शर्मा मंगलवार को यहां राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) हासिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, सदस्य वी.के. पॉल, वरिष्ठ सलाहकार (एसडीजी) डॉ. योगेश सूरी, संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक शोम्बी शार्प भी मौजूद रहे। दो दिवसीय सम्मेलन मंगलवार को संपन्न हो गया।
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में यूएनडीपी एसडीजी नॉलेज हब पोर्टल, राज्य सरकार द्वारा तैयार एसडीजी-2 डेशबोर्ड तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा विश्लेषण डेशबोर्ड का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि जीव-जन्तुओं की कई लुप्तप्राय: प्रजातियां बचाने के लिए पर्यावरण संतुलन आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन पर चिंता जताते हुए उन्होंने आह्वान किया कि यदि हमारी आवश्यकता पृथ्वी को नुकसान पहुंचा रही है तो उसे त्याग कर प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। वृक्ष, नदी व पर्वत से वैसा ही रिश्ता बनाने की जरूरत है, जैसा मां-बाप और भाई-बहन से होता है। यदि यह रिश्ता बनावटी होगा तो वह टूट जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नागरिक अपना कर्तव्य पूरा कर किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे जो आत्म अनुभूति मिलेगी वही हमारा सच्चा पुरस्कार है। राज्य सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के संकल्प को साकार करने के लिए कार्य कर रही है।
इसके माध्यम से एसडीजी को लेकर भारतीय संदर्भ में ऑनलाइन सर्टिफिकेशन पाठ्यक्रम पूरा किया जा सकेगा। इसी में एक भाग ऐसा होगा, जिससे एसडीजी के बारे में प्रशिक्षकों व युवाओं को जानकारी मिल सकेगी।
Published on:
06 Mar 2024 11:02 am

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