
मुंडोता स्थित गायत्री सप्तक्रांति ट्रस्ट के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक गौ अनुसंधान केन्द्र में 23 से 25 फरवरी को तीन दिवसीय विशाल स्वावलंबी चिकित्सा शिविर का आयोजन होगा। स्वावलंबी चिकित्सा शिविर में डायबिटीज, निम्न एवं उच्च रक्तचाप (बी.पी.), सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, कैंसर, हृदयरोग, कमर दर्द, घुटने का दर्द, माइग्रेन, साइनस, लिवर की खराबी, त्वचा रोग, थाइराइड, गठिया आदि सभी प्रकार के रोगों का उपचार 20 से अधिक निर्दोष प्रभावशाली अहिंसात्मक चिकित्सा पद्धतियों से किया जाएगा। शिविर में आचार्य हस्ती अहिंसात्मक चिकित्सा शोध संस्थान, जोधपुर के डॉक्टर राकेश निहाल के नेतृत्व में लोगों को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से स्वस्थ रहने की तकनीक सीखेंगे।
क्या होती है स्वालंबी चिकित्सा
स्वयं के द्वारा स्वयं का उपचार कर स्वस्थ होने की विधि को स्वावलंबी चिकित्सा कहते हैं। उपचार की इन चिकित्सा पद्धतियों यथा पैरों का संतुलन, नाभि संतुलन, मेरुदंड संतुलन, पंच महाभूतत चिकित्सा, मैथी चिकित्सा, डोरी चिकित्सा, स्वर चिकित्सा, कपिंग चिकित्सा, चुम्बक चिकित्सा, स्वमूत्र गौमूत्र चिकित्सा, सूखी चिकित्सा, मुद्रा चिकित्सा, मुट्ठी मुद्रा, यज्ञ हवन चिकित्सा, मुस्कान से चिकित्सा, ध्यान से चिकित्सा, स्प्रिंग से चिकित्सा, खानपान से चिकित्सा, गौ दुग्धासन, मेरुदंड के व्यायाम, नाभि में घी और मेथी, प्राणायाम द्वारा प्राणों को पुष्ट करना, नाक मुंह बंद कर सांस बाहर छोड़ना, पेन पेंसिल से रोग का पता लगाना, स्थिर सोकर रोग का पता लगाना, नैपकिन से नहाना, सोने का सही तरीका, कान में रुई, गन्डुस, मिनी मैगनेट से ऊर्जा बढ़ाना घटाना, घर का अनाज राशन संभालना, सफ़ेद जहर एवं कांसा थाली आदि में यथासंभव दवा एवं चिकित्सकों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती। यह चिकित्सा पद्धतियां सहज, सरल, सस्ती, स्थायी दुष्प्रभावों से रहित, रोग के मूल कारणों को दूर कर शरीर की प्रतिकारात्मक क्षमताओं के सदुपयोग की प्रेरणा देती है।
आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक गौ अनुसंधान केंद्र गायत्री आश्रम अरावली पर्वत माला की तलहटी में 9 बीघा क्षेत्र में फैला है। पहाड़ी की गोद में बसा यह सुरम्य स्थल ध्यान साधना की दृष्टि से भी अपने आप में विशेष है। गायत्री परिवार की सातों क्रांतियों साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नारी जागरण, स्वावलंबन, व्यसन मुक्ति एवं कुरीति उन्मूलन इन सभी पर इस केंद्र के माध्यम से क्रांतिकारी कार्य हो रहा है और आगे भी अकल्पनीय स्तर पर होना है। गौ माता भारतीय संस्कृति की रीढ़ एवं आधार है। वह घर घर में कैसे स्थापित हो, इस हेतु गहन शोध कार्य इस आश्रम से हो रहा है।
Published on:
22 Feb 2024 08:32 pm
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