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शहर के रीयलिस्टिक पेंटिंग आर्टिस्ट ने कोटा रिवर फ्रंट पर बनाया हवामहल, गणेश पोल

-रियलिस्टिक आर्ट में पोर्ट्रेट और रियासतकालीन पेंटिग्स को कैनवास पर उकेरते हैं

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जयपुर

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Mohmad Imran

Jun 19, 2023

शहर के रीयलिस्टिक पेंटिंग आर्टिस्ट ने कोटा रिवर फ्रंट पर बनाया हवामहल, गणेश पोल

शहर के रीयलिस्टिक पेंटिंग आर्टिस्ट ने कोटा रिवर फ्रंट पर बनाया हवामहल, गणेश पोल

जयपुर। कोटा शहर में चंबल नदी पर बन रहे रिवर फ्रंट की साज-सजावट और प्रदेश की प्रमुख हेरिटेज साइटों में से चुनिंदा को इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर उकेरने का काम जयपुर के रियलिस्टिक आर्ट शैली के कलाकार ओम प्रकाश भाटी ने किया है। भाटी ने बताया कि कोटा रिवर फ्रंट पर जो आर्टवर्क उन्होंने किया है, वह इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने सभी ऐतिहासिक इमारत की वास्तविक डिजाइंस को ही चित्रित करने की कोशिश की है। ऐसा इसलिए कि वास्तविक डिजाइन या पेंटिंग से अलग या अपनी ओर से कुछ नया या अलग करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह ऐतिहासिक इमारतें हैं।

राजपूत व मारवाड़ी कलाकृतियों से सजाया
उन्होंने रिवर फ्रंट के मुख्य द्वार पर नवलगढ़ की प्रसिद्ध पोद्दार हवेली की रेप्लिका के भित्ति चित्रों में राजपूत व मारवाड़ी कलाकृतियों की विभिन्न शैलियों को चित्रित किया है। हवेली अपने छज्जों व झरोखों पर किए गए बारीक उम्दा नक्काशी तथा भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। रेप्लिका में भी सर्वत्र कृष्ण लीला की कथाएं चित्रित की गई हैं। हवेली के हेरिटेज, मनोरम चित्रों और दरवाजों के दोनों ओर गोखा कहे जाने वाले गार्ड भी चित्रित किए हैं, जो राजपूताना वास्तुकला का एक सुंदर मिश्रण हैं।

हवामहल और गणेश पोल को भी उकेरा
भाटी ने रिवर फ्रंट का सबसे कलात्मक द्वार आमेर किले के गणेशपोल को बताया। इसे बनाने के लिए भाटी ने पारंपरिक राजपूताना चित्र शैली का इस्तेमाल किया है। हालांकि कुछ कार्य में मुगल शैली का भी प्रभाव दिखाई देता है। मुख्य द्वार पर गणेश जी की सुंदर नक्काशी की है। खूबसूरत हवामहल राजपूत स्थापत्य शैली का शानदार मिश्रण है इसकी घुमावदार छतरियां, पुष्प पैटर्न, कमल के रूपांकन और बांसुरी वाले स्तंभ को भी यहां दर्शाया है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करने में उसकी डिजाइन और बारीकी के आधार पर 15 से 20 दिन और कभी-कभी एक महीने से ज्यादा का समय भी लगता है।

नेचुरल कलर का करते हैं इस्तेमाल
भाटी ने बताया कि वह ओरिजिनल आर्ट वर्क में उपयोग किए गए नेचुरल कलर से ही कोई प्रोजेक्ट तैयार करते हैं। महंगे होने के साथ ही नेचुरल कलर बनाने की प्रक्रिया भी बहुत लंबी होती है। बाजार में उपलब्ध कलर में भी कुछ नया करते हुए ऐसे कलर प्रयोग में लेते हैं जिससे हवा, पानी, धूल मिट्टी का असर ज्यादा ना पड़े तथा लंबे समय तक आर्ट वर्क की अहमियत बनी रहे। अपनी कला के लिए वह कई सम्मान और अवॉर्ड हासिल कर चुके हैं। स्कूल-कॉलेज की पाठ्यपुस्तकों में भी उनके बनाए चित्रों का इस्तेमाल किया गया है। एक ड्रॉइंग टीचर के रूप में भाटी अब तक हजारों बच्चों को इस कला से जोड़ चुके हैं। उनके सिखाए बच्चे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर (राष्ट्रपति से) भी पुरस्कृत हो चुके हैं।

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