जयपुर. गणेश चतुर्थी (मंगलवार) को लोग न केवल घर-घर गणपति की स्थापना करेंगे। प्रतिमा भी खुद तैयार करने के सथ ही विसर्जन भी अलग तरीके से करेंगे। जलाशयों में शुद्ध जल नहीं होने के कारण लोगों ने यह तरीका अपनाया है। घरों में विसर्जन के लिए लोग मिट्टी की छोटी प्रतिमाएं तैयार की। दरअसल, हर साल लोग घरों में गणपति स्थापना करते हैं। उन्हें विसर्जन करने के लिए मावठा और कानोता बांध में जाते हैं। लेकिन वहां शुुद्ध जलाशय नहीं होता। ऐसे में लोगों ने इस बार इसका तोड़ निकाला है। लोग छोटी मूर्ति स्थापना कर घरों में ही विसर्जन करेंगे। घरों में शुद्ध जल में गणपति का विसर्जन कर जल को गमलों में या फिर मंदिर में जाकर पेड़ को अर्पित करेंगे।

पत्रिका की ओर से भगवान गणपति के ‘घर-घर सृजन, घर-घर विसर्जन के आह्वान के तहत राजधानी की मातृशक्ति में भी मिट्टी सहित अन्य प्राकृतिक वस्तुओं से प्रथम पूज्य के सृजन को लेकर खासा उत्साह नजर आया। पत्तों, सुपारी, हल्दी की गांठ व सूखे मेवों आदि से कई कॉलोनियों व घरों में इस बार भगवान गणेश की मूर्ति और छवि का निर्माण किया। ताकि पर्यावरण के संरक्षण के साथ ही शहर के तालाबों, सरोवरों और जलस्त्रोतों का स्वरूप न बिगड़े और घर में विसर्जन के बाद भगवान गणपति आजीवन घर में ही रहें। शहर की मातृशक्ति का मानना है कि गणेश चतुर्थी पर खुद ईको फ्रेंडली गणेशजी बनाने से अगली पीढ़ी में भी संस्कृति और संस्कारों का प्रवाह होगा।

आदर्शनगर फ्रंटियर कॉलोनी निवासी मीनाश्री गोयल ने बताया कि चिकनी मिट्टी से एक से दो इंच ऊंची प्रतिमा बनाई है। प्रतिमा बनाने में पीओपी के इस्तेमाल से विसर्जन के बाद पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। चिकनी मिट्टी से महज दो घंटे में प्रतिमा तैयार हुई। मिट्टी के गणेश का घर में विसर्जन करने से हमेशा घर में सकारात्मक उर्जा रहती है। मुल्तानी मिट्टी व नारियल तेल से एक दिन में कई प्रतिमाएं तैयार की जा सकती हैं। जानवी गोयल ने बताया कि मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाने से पर्यावरण संरक्षित रहता है।
—मुस्कान प्रजापत ने बताया कि मिट्टी में स्वाभाविक पवित्रता होती है। भगवान की पूजा के लिए खुद प्रतिमा तैयार की है। मिट्टी में तुलसी व अश्वगंधा सहित अन्य औषधीय महत्व के पौधों के बीज मिलाकर प्रतिमा का निर्माण किया है। गमले में विसर्जन के कुछ दिन बाद बीज के पौधा बनने पर उससे औषधियां प्राप्त होगी। हम पुरानी मान्यताओं में इस तरह उलझे हुए हैं कि बदलाव को सहज स्वीकार नहीं करते, लेकिन शुरुआत तो कर ही सकते हैं। कई लोगों को प्रतिमा बनाना सिखाया है।

यह बोले विद्वान
ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि पीओपी सहित अन्य केमिकल से तैयार प्रतिमाएं मनुष्य के साथ ही जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी नुकसानदायक रहती हैं। ऐसे में आमजन को इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं घर पर आसानी से एक परात या किसी भी पात्र में कर सकते हैं। यह जल शुद्ध होता है। पानी को छानने के बाद जल शुद्ध हो जाता है। इसमें गंगाजल मिल सकते हैं। आमतौर पर प्राकृतिक स्त्रोतों पर जल कई बार साफ नहीं रहता।
प्रतिमा में गणेश जी की सूंड बाईं ओर होनी चाहिए। घर पर स्थापित करने के लिए बाईं ओर सूंड वाले गणपति की मूर्ति शुभ मानी जाती है। इससे घर पर सुख समृद्धि आती है। भगवान की ऐसी प्रतिमा लें जिसमें गणेश जी बैठे हुए हों।