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पुलिस का सूचना तंत्र फिर फेल, किरोड़ी किसानों को लेकर अचानक पहुंच गए सिविल लाइन फाटक

प्रदेश की पुलिस का सूचना तंत्र लगातार फेल साबित हो रहा है। सांसद किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को एमएसपी पर बाजरा खरीद की मांग को लेकर किसानों को लेकर सिविल लाइन फाटक पहुंच गए और पुलिस को कानोंकान खबर तक नहीं लगी। किरोड़ी के अचानक पहुंचते ही पुलिस हरकत में आई और उन्हें सिविल लाइन फाटक के पास रोका। इससे पहले भी किरोड़ी ने पुलिस के सूचना तंत्र को धता बताते हुए मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना दिया था।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Oct 29, 2021

पुलिस का सूचना तंत्र फिर फेल, किरोड़ी किसानों को लेकर अचानक पहुंच गए सिविल लाइन फाटक

पुलिस का सूचना तंत्र फिर फेल, किरोड़ी किसानों को लेकर अचानक पहुंच गए सिविल लाइन फाटक

जयपुर।

प्रदेश की पुलिस का सूचना तंत्र लगातार फेल साबित हो रहा है। सांसद किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को एमएसपी पर बाजरा खरीद की मांग को लेकर किसानों को लेकर सिविल लाइन फाटक पहुंच गए और पुलिस को कानोंकान खबर तक नहीं लगी। किरोड़ी के अचानक पहुंचते ही पुलिस हरकत में आई और उन्हें सिविल लाइन फाटक के पास रोका। इससे पहले भी किरोड़ी ने पुलिस के सूचना तंत्र को धता बताते हुए मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना दिया था।

दरअसल प्रदेश में बाजारे का किसानों ने बेचान शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रुपए तय किया है, लेकिन एमएसपी पर राजस्थान में बाजरे की खरीद नहीं हो रही है। जिसके चलते किसानों को औने—पौने दामों पर अपनी फसल को बेचना पड़ रहा है। इससे नाराज किसानों ने किरोड़ी के साथ सिविल लाइन फाटक का कूच कया। किसानों ने ऊंट गाड़ियों पर ही चढ़कर गहलोत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गहलोत सरकार से बाजरे के लिए एमएसपी लागू करने की मांग की। इसके बाद किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और धरना समाप्त कर चले गए।

केंद्र पैसा देती है गहलोत को क्या दिक्कत

मीणा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में बाजरा के अच्छी फसल होती है। मगर एमएसपी पर खरीद नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब खरीद का सारा पैसा केंद्र देता है तो गहलोत को क्या दिक्कत है, समझ नहीं आ रहा है। कृषि कानूनों को लेकर किसानों को गुमराह करने के लिए वे उनके साथ खड़े हो जाते हैं, लेकिन एमएसपी को लेकर सरकार कुछ नहीं कर रही।

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