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Rajasthan New District: विशेषाधिकारियों को नहीं मिल रही बैठने की जगह, 15 जिलों में शुरू हुई कार्यालय की तलाश

Rajasthan New District : प्रदेश में नए जिलों की घोषणा के दो महीने बाद अशोक गहलोत सरकार ने जिलों के निर्माण के लिए यहां विशेषाधिकारी तो लगा दिए लेकिन अब इन्हें काम करने के लिए कार्यालय ही नहीं मिल पा रहे हैं।

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IAS Officer Searching Office In 15 Rajasthan New Districts For Work

दूदू तहसीलदार के कार्यालय में विशेषाधिकारी अर्तिका शुक्ला का कार्यालय

Rajasthan New District : प्रदेश में नए जिलों की घोषणा के दो महीने बाद अशोक गहलोत सरकार ने जिलों के निर्माण के लिए यहां विशेषाधिकारी तो लगा दिए लेकिन अब इन्हें काम करने के लिए कार्यालय ही नहीं मिल पा रहे हैं। 15 जिलों में लगाए गए विशेषाधिकारी के लिए कार्यालय की जगह तलाश रहे हैं। नागौर से हटकर बनने वाले डीडवाना-कुचामन में अभी कार्यालय चिन्हित नहीं किया गया है। विशेषाधिकारी सीताराम जाट ने दोनों शहरों में तीन-तीन दिन ठहरने का निर्णय किया है। वहीं खैरथल के विशेषाधिकारी डॉ.ओमप्रकाश बैरवा को कार्यालय के लिए जगह कृषि उपज मंडी के एग्रो टावर में मिली है।

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तहसीलदार के कार्यालय में विशेषाधिकारी
इन दो नए जिलों की तरह लगभग सभी जिलों में विशेषाधिकारियों को अपना कार्यालय बनाने में परेशानी हो रही है। अधिकतर जगह इनका कार्यालय एसडीएम कार्यालय को बनाया गया है। दूदू में तो तहसीलदार के नवनिर्मित कार्यालय में ही विशेषाधिकारी अर्तिका शुक्ला ने अपना कार्यालय बनाया है। इसी तरह कोटपूतली-विराटनगर के मामले में विशेषाधिकारी ने अपना कार्यालय कोटपूतली में रखा है। यहां नगर परिषद आयुक्त के कमरे को उन्होंने अपना कार्यालय बनाया है। कार्यालय बनने के एक दिन बाद शुक्रवार को राज्यमंत्री राजेन्द्र यादव की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया गया।

ब्यावर में भवन नहीं, डाक बंगले में ही ऑफिस
ब्यावर में विशेषाधिकारी के कार्यालय के लिए जगह नहीं मिली। फिलहाल डाक बंगले में ही कार्यालय खोला गया है। विशेषाधिकारी रोहिताश्व सिंह यहीं से नए जिले की रूपरेखा तैयार करेंगे। इसी तरह केकड़ी में अभी नया कार्यालय ही नहीं मिला है। उन्हें नगर परिषद् कार्यालय में ही बैठानी की तैयारी चल रही है।

विशेषाधिकारियों की ये रहेगी जिम्मेदारी
नए जिलों को स्वरूप देने के लिए ही विशेषाधिकारी लगाए गए हैं। 15 नए जिलों में लगाए विशेषाधिकारियों की देखरेख में नए जिलों का ढ़ांचा खड़ा होगा। ये अधिकारी नए जिलों के लिए गठित रामलुभाया कमेटी की सिफारिशों का परीक्षण कर नए जिलों का स्वरूप तय करने के लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे। इन प्रस्तावों के आधार पर ही नए जिलों की ढांचागत व्यवस्थाओं के लिए अधिसूचनाएं जारी होंगी।