
अब 300 नहीं 225 वर्गमीटर के भूखंडों पर बनाने होंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जयपुर।
अब 300 की बजाय 225 वर्गमीटर व इससे बड़े भूखंडों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना जरूरी होगी। नगरीय विकास विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद करीब 10 लाख भूखंड रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के दायरे में आ जाएंगे।
यूडीएच की एक्सपर्ट कमेटी ने इस संबंध में यूडीएच मंत्री शांतिधारीवाल को सिफारिश की थी। जिसके बाद यह आदेश जारी किए गए हैं। प्रमुख सचिव यूडीएच कुंजीलाल मीणा की अध्यक्षता में गठित कमेटी का मानना था कि 300 वर्गमीटर व इससे बड़े भूखंडों की संख्या कम हैं, इसलिए इस क्षेत्रफल को घटाकर 225 वर्गमीटर किया जाना चाहिए। हालांकि पहले इसे 167 वर्गमीटर से शुरुआत करने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐसे भूखंडों पर सेटबैक में ज्यादा जगह नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
2500 वर्गमीटर के भूखंड पर वेस्ट वाटर की रीसाइक्लिंग जरूरी
इसी तरह छोटे भूखंडों पर बनी इमारतों को भी इस आदेश के तहत जल संरक्षण के दायरे में लगाया गया है। अब 5000 वर्ग मीटर व उससे बड़े भूखंडों के बजाय 2500 वर्ग मीटर व उससे बड़े भूखंडों के लिए पर बनी इमारतों के लिए बाथरूम और रसोई के वेस्ट वाटर की रीसाइक्लिंग जरूरी होगी। इसमें टॉयलेट से निकलने वाला पानी शामिल नहीं होगा। टॉयलेट में उपयोग किए जाने वाले वॉटर क्लोजेट में ड्यूल प्लस बटन सिस्टम जरूरी होगा। ताकि जितनी आवश्यकता हो, उतना ही पानी खर्च किया जा सके। मॉडल बिल्डिंग बायलॉज यह प्रावधान जोड़ा गया है।
भूजल की गंभीर स्थिति..
-राजस्थान में जितना पानी रिचार्ज हुआ, उससे ज्यादा जमीन से पानी निकाला जा रहा है।
-प्रदेश में भूजल दोहन की दर 139.52 से बढ़कर 139.88 पहुंच गई है।
-राज्य के 248 ब्लॉक में से 25 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में हैं।
Published on:
07 Sept 2021 10:02 pm
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