
सरकार दबाए बैठी सीएनजी नीति, लागू हो तो खुले में ले सकेंगे श्वांस
उमेश शर्मा/जयपुर। राजस्थान में ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने और प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार गंभीर नहीं है। तभी तो छह माह पहले जारी सीएनजी (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) नीति ड्राफ्ट को लागू करने की बजाय उसे फाइलों में दफन कर दिया गया। नीति लागू हो जाए तो प्रदूषण स्तर में कमी आने के दूसरे दरवाजे भी खुलें और जनता खुलकर श्वांस ले सकेगी। इस नीति में अलवर, जोधपुर, जयपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर पर फोकस किया गया है, क्योंकि इन शहरों में ही वाहनों के धुएं से सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है। नीति लागू होने के बाद इन शहरों में सीएनजी चलित बसें खरीदने की राह आसान हो जाएगी। पुरानी बसों में सीएनजी किट लगाए जाएंगे। निजी वाहनों के लिए भी सीएनजी सस्ती होगी।
नीति में यह प्रावधान
1- सीएनजी पर वैट 14.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा
असर- सीएनजी सस्ती होगी,जिससे लोगों का सीएनजी वाहन खरीदने की तरफ रुझान बढ़ेगा
2- दस साल पुराने डीजल कॉमर्शियल व पैसेंजर वाहनों में सीएनजी किट लगाने पर पांच साल का अतिरिक्त एक्सटेंशन मिलेगा
असर- ज्यादा वर्ष तक वाहन संचालन की अनुमति से लोगों को कुछ वर्ष तक नया वाहन खरीदने की जरूरत नहीं होगी
3- जो वाहन सीएनजी में कन्वर्ट होते हैं, उन्हें दोबारा पंजीयन कराने पर 100 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी
असर- पंजीयन का पैसा नहीं लगेगा तो लोगों की जेब पर आर्थिक भार कम होगा
4- नीति लागू होने के छह महीने के भीतर जेसीटीएसएल और अन्य सिटी बस कंपनियों को बसों के सीएनजी कन्वर्जन का प्लान तैार करना होगा
असर-लाखों रुपए रोजाना डीजल पर खर्च हो रहे है, प्रदूषण हो रहा है जो अलग। इन दोनों की ही बचत होगी
5- सीएनजी वाहनों को रोड टैक्स में छूट दी जाएगी
असर- अभी अलग-अलग वाहनों पर रोड टैक्स 1 से 8 प्रतिशत तक है। यह पैसा भी बचेगा
फैक्ट फाइल
-राजस्थान रोडवेज की बस- 4100
-संचालित बसें- 3100
-रोडवेज में रोजाना डीजल की खपत-2.15 लाख लीटर
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यह भी फायदा
-नीति लागू होने के दो साल के भीतर शिक्षण संस्थान की बसों व अन्य निजी बसों को भी सीएनजी से चलाने की बंदिश।
-निजी क्षेत्र में चल रहे सार्वजनिक परिवहन जैसे बस, आॅटो का दोबारा पंजीयन उसी स्थिति में होगा, जब उन्हें सीएनजी पर शिफ्ट कर लिया जाएगा।
हाल-ए-प्रदूषण
-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अनुसार अभी भिवाड़ी राजस्थान में सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। यहां औसतन वायु प्रदूषण का स्तर दिसम्बर में 270 से 305 एक्यूआई के बीच रहा।
-इसके अलावा जयपुर का प्रदूषण का स्तर दिसम्बर की शुरुआत में 190 एक्यूआई दर्ज किया गया। यहां वायु प्रदूषण का स्तर औसतन इन दिनों में 90 से 100 के बीच रहा।
-पाली का स्तर 239, कोटा का 170 से 190 एक्यूआई के बीच रहा है। प्रदेश में भिवाड़ी, जयपुर, जोधपुर, पाली और कोटा सबसे प्रदूषित शहर हैं।
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-सीएनजी नीति ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे थे और उसी आधार पर प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद नीति लागू कर दी जाएगी।
-कन्हैलाल स्वामी, परिवहन आयुक्त
Published on:
07 Jan 2023 05:00 pm
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