
सुरेश व्यास/जयपुर।
क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े संसदीय क्षेत्र बाड़मेर-जैसलमेर के भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम (Col. Sonaram Choudhary) ने जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से मुलाकात कर मारवाड़ में सियासी सनसनी खड़ी कर दी है। सोनाराम गहलोत के धुर विरोधी नेता माने जाते हैं, लेकिन भाजपा नेता मानवेंद्रसिंह के विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस का दामन थामने के बाद बदली बाड़मेर-जैसलमेर की राजनीति के दौर में सोनाराम के कदम पर हर किसी को अचम्भा हो रहा है। हालांकि सोनाराम की गहलोत से मुलाकात नहीं हो पाई और वे कुछ देर इंतजार के बाद रवाना हो गए, लेकिन इसके बाद मानवेंद्र की गहलोत से मुलाकात के बाद नए सियासी समीकरण ढूंढे जाने लगे हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के चलते सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर गृह नगर पहुंचे सीएम गहलोत के लिए भी शुक्रवार की सुबह सरप्राइज वाली रही होगी। भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम का उनसे मिलने अचानक सर्किट हाउस पहुंचने का अंदाज तो गहलोत भी नहीं लगा पाए होंगे। यही कारण है कि वे अन्य लोगों से मुलाकात में व्यस्त रहे और गहलोत उन्हें बुलाते इससे पहले ही कुछ देर इन्तजार कर सोनाराम रवाना हो गए। बाहर आए तो मीडिया के सामने भी खुलकर कुछ नहीं बोले। इतना ही कहा शिष्टाचार के नाते मिलने आया था।
कर्नल सोनाराम गहलोत के धुर विरोधी नेता हैं। पिछले आम चुनाव से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे भाजपा के दिग्गज नेता जसवंतसिंह जसोल को पराजित किया। इससे पहले कांग्रेस में रहते हुए भी वे गहलोत से शायद ही मिलने जाते थे। हालांकि उनका घर भी सर्किट हाउस के ठीक सामने हैं। लेकिन आज उनका अचानक गहलोत से मिलने पहुंचना चौंकाने वाली घटना थी। सोनाराम गहलोत के कमरे में भी गए, लेकिन दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई। गहलोत के विशेषाधिकारी उन्हें बुलाने बाहर आते इससे पहले ही सोनाराम वहां से निकल गए।
बाहर आकर उन्होंने मीडिया से कहा कि वे विधानसभा चुनाव के बाद गहलोत से नहीं मिले थे। ऐसे में बधाई देने शिष्टाचार भेंट के लिए पहुंचे थे। मुलाकात हो नहीं पाई। उन्हें जयपुर निकलना था, बाद में गहलोत से फोन पर बात भी हुई।
गहलोत और सोनाराम की इस वर्चुअल मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है। सोनाराम के बाद गहलोत से मिलने पहुंचे मानवेंद्र सिंह ने इसे और अहम बना दिया है। गहलोत हालांकि इस पर कुछ कहने से बचते रहे और इतना ही कहा कि सोनाराम आए थे, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
इधर राजनीतिक प्रेक्षक सोनाराम के कदम को सियासी सरप्राइज मान रहे हैं। खासकर तब जब बाड़मेर-जैसलमेर से कर्नल सोनाराम के सामने मानवेंद्र का उतरना लगभग तय माना जा रहा है। इधर, बाड़मेर के कुछ कांग्रेस नेता भी मानवेंद्र को संसदीय चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने पर परोक्ष रूप से खुश नहीं हैं। गहलोत सरकार के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी के नाम भी ऐसे नेताओं की फेहरिस्त में गिनाया जा रहा है।
कर्नल सोनाराम की पहल को लोकसभा चुनाव से पहले इस नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि बाड़मेर-जैसलमेर से प्रत्याशी चयन कांग्रेस-भाजपा दोनों के लिए उलझी हुई गुत्थी है। ऐसे में इस पहल को लेकर कई कयास शुरू हो गए हैं।
Published on:
08 Mar 2019 04:14 pm
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