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जनता से दूरी: ‘माननीयों’ की बंद कमरों से सियासी बयानबाजी, क्षेत्र में नहीं आ रहे नजर

विधानसभा और संसद में बैठे 'माननीयों' को ढाई साल बाद जनता के बीच जाना है लेकिन आज जब जनता को उनकी जरूरत है तो लगभग सभी जन प्रतिनिधि घरों में बैठे हैं।

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जयपुर। विधानसभा और संसद में बैठे 'माननीयों' को ढाई साल बाद जनता के बीच जाना है लेकिन आज जब जनता को उनकी जरूरत है तो लगभग सभी जन प्रतिनिधि घरों में बैठे हैं। इक्का-दुक्का को छोड़ दें तो ज्यादातर विधायकों ने क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारियों या जनता से यह तक नहीं पूछा कि उनकी जरूरतें क्या हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों ने तो अपनी निधि से राशि जारी करने का कलक्टर को पत्र भेजकर इतिश्री कर ली। जबकि राज्य की जनता कोरोना महामारी के चलते बीमार परिजनों के लिए अस्पतालों में पलंग, रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन के लिए परेशान हो रही है।

कोरोना की पहली लहर के समय अनेक जनप्रतिनिधियों ने जनता की सुध ली, क्षेत्रों में भी नजर आए लेकिन इस बार कोई जनप्रतिनिधि जनता की सुध लेता क्षेत्र में नहीं दिख रहा। हां, बंद कमरे से सियासी बयान जारी करने में कोई पीछे नहीं दिख रहा। राज्य के कांग्रेस नेता हर मुद्दे पर केन्द्र की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जबकि भाजपा के नेता कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिए हुए हैं।

आगे आकर यों कर सकते हैं मदद
क्षेत्रों के भामाशाहों की मदद से धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज और स्थानीय अस्पतालों में पंलग की व्यवस्था कर सकते हैं। बढ़ती सख्ती के बीच लोगों को रोजी-रोटी के संकट से उबारने में भी भूमिका निभा सकते हैं।

मंत्रियों के दरवाजे बंद, विधायक नहीं उठा रहे फोन
कोरोना ने पैर पसारा तो एक-दो को छोड़कर सभी मंत्रियों ने अपने 'दरवाजे' बंद कर लिए हैं। ज्यादातर मंत्रियों के फोन नहीं उठाने की पहले ही शिकायतें आती रहती हैं। अब मंत्रियों की तरह ही ज्यादातर विधायकों के फोन बंद मिलने की शिकायतें आ रही हैं। ऐसे में परेशान जनता मदद के लिए आखिर कहां जाए? ज्यादातर जन प्रतिनिधियों ने इसके लिए कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध नहीं कराया है।

दावे अपने-अपने
कांग्रेस
- रफीक खान, आदर्शनगर विधायक: चिकित्सा सुविधाओं के लिए जहां भी विधायक निधि से राशि चाहिए होगी, देंगे। इसके लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को कह भी रखा है।
- प्रतापसिंह खाचरियावास, परिवहन मंत्री व सिविललाइंस विधायक: जरूरतमंदों को कोई कमी नहीं आने देंगे। जहां जररूत हो, मदद के लिए तैयार रहेंगे।

- अमीन कागजी, किशनपोल विधायक: विधायक निधि आमजन की मदद के लिए ही है। जहां भी जरूरत होगी, राशि देंगे।

- मुकेश भाकर, लाडनूं विधायक: ऑक्सीजन के लिए विधायक निधि से 15 लाख रुपए दिए हैं। उप जिला अस्पताल में 15 बेड तैयार कराए हैं। भामाशाहों की मदद से 50 पलंग तक बढ़ा रहे हैं। सरकार से फिजिशियन मिल जाए तो और सुविधा हो जाएगी।

- इन्द्रराज गुर्जर, विराटनगर विधायक: दो अस्पतालों में पिछली बार सोनोग्राफी मशीन, एम्बुलेंस, एक्सरे सहित अन्य के लिए निधि से 1 करोड़ रुपए दिए थे। अभी कोई मांग नहीं आई है।

भाजपा
- कालीचरण सराफ, मालवीयनगर विधायक: ऑक्सीजन के लिए 25 लाख रुपए देने की जिला कलक्टर को अनुशंसा भेजी है।

- निर्मल कुमावत, फुलेरा विधायक: क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारियों की मांग के अनुसार 3 एंबुलेंस खरीदने के लिए 60 लाख रुपए देने की अनुशंसा की है।
- रामलाल शर्मा, चौमूं विधायक: पिछले माह 3 चिकित्सा केन्द्रों में वेंटिलेटर, आइसीयू उपकरणों आदि के लिए 21 लाख रुपए विधायक निधि से देने की अनुशंसा की है।

- अशोक लाहोटी, सांगानेर विधायक: जहां से भी मांग आएगी, तुरन्त मदद करेंगे।
- प्रताप सिंह सिंघवी, छबड़ा विधायक: पिछले साल 80 लाख की अनुशंसा की थी। इस साल प्रशासन जैसे ही कहेगा, अनुशंसा करेंगे।