scriptRajasthan: अमराराम के जीतते ही माकपा का 15 साल का सूखा खत्म, गठबंधन के सहारे लगा दिया मास्टर स्ट्रोक | CPIm 15-year drought ended with Amar Ram's victory in Rajasthan, this time a master stroke with the help of alliance | Patrika News
जयपुर

Rajasthan: अमराराम के जीतते ही माकपा का 15 साल का सूखा खत्म, गठबंधन के सहारे लगा दिया मास्टर स्ट्रोक

Sikar News : माकपा ने देशभर में 52 सीटों पर लोकसभा के चुनावी मैदान में प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन माकपा को चार ही सीटों पर जीत हाथ लग सकी। इसमें राजस्थान की सीकर सीट भी शामिल है।

जयपुरJun 08, 2024 / 02:35 pm

Lokendra Sainger

राजस्थान में पिछले करीब दो दशक से लगातार सियासी हासिए पर चल रही माकपा ने गठबंधन के सहारे बड़ा मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है। माकपा ने देशभर में 52 सीटों पर लोकसभा के चुनावी मैदान में प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन माकपा को चार ही सीटों पर जीत हाथ लग सकी। इसमें राजस्थान की सीकर सीट भी शामिल है। लोकसभा चुनाव के हिसाब से माकपा की स्ट्राइक रेट की बात करें तो यह लगभग आठ फीसदी रही है।
कांग्रेस का गठबंधन के तहत माकपा को सीट देना बड़ा टर्निंग प्वॉइंट रहा। क्योंकि खुद कांग्रेस के कई नेता माकपा को सीट देने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने गृह जिले के सियासी हालातों को भांपते हुए सभी नेताओं को इसके लिए सहमत कर दिल्ली तक संदेश दिया। ऐसे में इस सीट की गठबंधन की राहें खुल सकी। माकपा की जीत राहें खुलते ही अब कार्यकर्ताओं के नेता पुरानी सियासी जमीन को और तेजी से सींचने में जुट गए है।
माकपा ने काफी नाजुक समय पर लोकसभा का चुनाव गठबंधन के तहत जीता है। ऐसे में माकपा की पहली प्राथमिकता शेखावाटी में फिर से पार्टी को मजबूत करने की है। माकपा के जनाधार को बढ़ाने में आंदोलनों का हमेशा अहम रोल रहा है। देश व प्रदेश में विपक्ष में रहने की वजह से माकपा को जनता की आवाज मजबूती से उठाने का मौका भी मिल सकेगा। यदि माकपा अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाती है तो इसका फायदा आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनाव में भी मिल सकता है।
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भाजपा की गुटबाजी पर भारी पड़ी एकजुटता

विधानसभा चुनाव के समय भाजपा में तेज हुई गुटबाजी का दौर लोकसभा चुनाव तक भी जारी रहा। सूत्रों की माने तो एक धड़े ने चुनाव प्रचार में एक नेता को अहम जिमेदारी दिए जाने पर नाराजगी जताना शुरू कर दिया था। सभाओं से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों में भाजपा के दोनों गुट एक जाजम पर तो दिखे लेकिन इनके दिल नहीं मिल सके। दूसरी तरफ माकपा और कांग्रेस ने भाजपा की इस कमजोरी को जमकर भुनाया। इसका फायदा जीत के रूप में मिला।
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आगामी चुनावों में गठबंधन का भविष्य

इस साल के आखिर में नगर निकायों के चुनाव होने है और इसके बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होंगे। ऐसे में सियासी गलियारों में अभी से कांग्रेस और माकपा के गठबंधन को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे है। क्योंकि कई नगरीय क्षेत्रों के साथ पंचायतों में कांग्रेस का काफी प्रभाव है। इस सफल गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं है।

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