जानकारी में अधिकारियों ने बताया कि यह टावर तत्कालीन सरपंच की मौखिक सहमति से लगाया गया। यहां 1985 में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित हुआ था, लेकिन उसकी भी अनुमति लिखित रूप में नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर पता चला कि 2002 से पूर्व का एक भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसके बाद ग्राम पंचायत में सरपंच के पदनाम से भेजे गए एमओ व चेक की जानकारी तो उपलब्ध है, लेकिन ग्राम पंचायत के खाते में राशि जमा नहीं होने की जानकारी ने सवाल खड़े किए हैं।