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जाडन ग्राम पंचायत में बिना किसी लिखित अनुमति के लगे एक कंपनी के मोबाइल

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S.D. upadhyay

May 05, 2015

पाली. जाडन ग्राम पंचायत में बिना किसी लिखित अनुमति के लगे एक कंपनी के मोबाइल टावर व एक्सचेंज भवन की किराया राशि सालों तक ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं हुई। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में सामने आया है कि कंपनी ने सरपंच के नाम चेक काटे और मनीऑर्डर भेजे। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि यह राशि कहां गई।


जानकारी में अधिकारियों ने बताया कि यह टावर तत्कालीन सरपंच की मौखिक सहमति से लगाया गया। यहां 1985 में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित हुआ था, लेकिन उसकी भी अनुमति लिखित रूप में नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर पता चला कि 2002 से पूर्व का एक भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसके बाद ग्राम पंचायत में सरपंच के पदनाम से भेजे गए एमओ व चेक की जानकारी तो उपलब्ध है, लेकिन ग्राम पंचायत के खाते में राशि जमा नहीं होने की जानकारी ने सवाल खड़े किए हैं।


सरपंच को नहीं मिली जानकारी

मात्र नौ सौ रुपए किराया आने की जानकारी मिलने पर फरवरी 2010 में सरपंच बने नारायणसिंह ने एमओ व चेक लेने बंद किए और स्थानीय कार्यालय से जानकारी मांगी तथा भवन खाली करने के लिए नोटिस दिया। 2011 में आरटीआई लगाई तो बताया कि राशि सरपंच के नाम से भिजवाई जा रही है।


नारायणसिंह बताते हैं कि उन्होंने चेक जमा नहीं करवाए और ग्राम पंचायत में रखे। उनके अनुसार पूर्व में संबंधित कंपनी की ओर से ग्राम पंचायत के खाते में कोई राशि जमा नहीं मिली है। हालांकि, आरटीआई में कंपनी ने कुछ चेक और मनी ऑर्डर के नम्बर उपलब्ध करवाए हैं, जिनके आधार पर भुगतान किया जाना बताया है।


जमा नहीं करवाया किराया

ग्राम पंचायत में लगे एक कम्पनी के मोबाइल टावर के लिए न तो एग्रीमेंट हुआ है और न ही राशि खाते में जमा हुई है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार कह चुके हैं, लेकिन फिर भी किराया जमा नहीं करवाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को अवगत करवाएंगे।

सुरेश बैरवा, सचिव, ग्राम पंचायत, जाडन