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राजस्थान का किसान खजूर की खेती में आजमा रहा हाथ

अरब देशों की मुख्य खेती में शुमार खजूर को राजस्थान की आबोहवा भी रास आ गई है। खजूर पौष्टिकता से भरपूर और स्वादिष्ट तो है ही, इसकी पैदावार करने वाले किसानों की जेबें भी भर रही हैं। खजूर की खेती के लिए गर्म तापमान की ज़रूरत होती है, इसलिए अब राजस्थान में भी इसकी खेती कर किसान फलने-फूलने लगे हैं। राज्य में करीब 1,100 हैक्टेयर में खजूर की खेती हो रही है।

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राजस्थान का किसान खजूर की खेती में आजमा रहा हाथ

राजस्थान का किसान खजूर की खेती में आजमा रहा हाथ

बीकानेर में 50 से अधिक स्थानों पर किसान खजूर की खेती कर रहे हैं। खजूर की खेती से किसान लाखों की कमाई कर रहे हैं। खजूर के पौधे पेड़ बनने के बाद सालों तक फल देते हैं। बीकानेर के गांव पेमासर के किसान शिवकरण कूकणा ने बताया, वह पेमासर में 10 और राणेरी में 20 बीघा क्षेत्र में खजूर की खेती पिछले सात सालों से कर रहे हैं। कई प्रयासों के बाद भी खेत में पैदावार नहीं हो रही थी, इसलिए पानी और मिट्टी की जांच करवाई फिर खजूर लगाया। अब 135 टन खजूर उत्पादन हो रहा है। किसानों को आमदनी बढ़ाने के लिए परम्परागत खेती के साथ अपने खेत में खजूर भी लगाने चाहिए।
54 किस्मों पर हो रहा अनुसंधान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। खजूर अनुसंधान निदेशक के डॉ. पीएस शेखावत ने बताया कि तापमान 50 डिग्री हो या एक डिग्री फिर भी खजूर की खेती सहज ही की जा सकती है। बंजर जमीन पर व कम गुणवत्ता पानी से भी इसकी उपज हो सकती है। विश्वविद्यालय में पहले 34 किस्म के खजूर उत्पादित होते थे। हाल में कुछ नई किस्मों पर अनुसंधान शुरू किया गया है। जल्दी ही 54 किस्म के खजूर खाने को मिलेंगे।
प्रदेश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन करने के साथ ही हनुमानगढ़ जिला भी अब खजूर की खेती में भी हाथ आजमा रहा है। इसकी खेती से अच्छी आमदनी होने के चलते जिले में खजूर उत्पादक किसानों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। जिले की बात करें तो कुल १३५ हेक्टेयर में खजूर की खेती हो रही है। करीब 50 किसान इसकी खेती कर रहे हैं। वर्तमान में खजूर के पेड़ों पर फूल खिल गए हैं। अगस्त तक फल बाजार में आएंगे। उद्यान विभाग के अधिकारी किसानों को खजूर की संभाल के बारे में लगातार ट्रेनिंग दे रहे हैं।
खारे पानी में खेती
खजूर के बाग को खारे पानी से भी सिंचित किया जा सकता है। इस पर बरसात व तेज तापमान का ज्यादा असर नहीं होता है। रोग व कीड़े भी इसमें ज्यादा नहीं लगते। एक हैक्टेयर में कुल 156 पौधे लगते हैं। इसमें 148 मादा व आठ पौधे नर के लगते हैं। प्रति पौधा 80 किलो से 160 किलो तक हो रहा है।
दक्षिण में भी मांग
दक्षिण के राज्यों में इसकी खूब मांग रहती है। थोक में करीब 70 रुपए प्रति किलो तक किसानों को इसकी कीमत मिल रही है। जिले में लाल व पीले रंग के खजूर की खेती हो रही है। बरही व खुलेजी किस्म के खजूर की खेती के लिए हनुमानगढ़ की आबोहवा को कृषि अधिकारी अनुकूल मान रहे हैं। करीब एक दशक से खजूर की खेती कर रहे किसान विजय सिंह गोदारा बताते हैं, परंपरागत खेती में गेहूं व कपास की फसल उगाने पर अधिकतम एक लाख रुपए प्रति हैक्टेयर तक आमदनी होती है, जबकि खजूर की खेती से चार लाख रुपए तक आमदनी हो सकती है।


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