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‘डायन’ का खौफ आज भी… -dayan pratha in jharkhand

जयपुर। डायन कहकर महिलाओं को प्रताड़ित करना अब भी नहीं रूक रहा, जबकि देश में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम लागू है। इसके बाद भी कई राज्यों में आज भी यह प्रथा महिलाओं के लिए हत्या तक का कारण बन रही है। ऐसा ही एक मामला फिर झारखंड से आया है। देखिए रिपोर्ट

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जयपुर

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Tasneem Khan

Nov 04, 2019

जयपुर। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूरवर्ती गांव बालिबंध मुंडा टोला में इसी गुजरे सप्ताह एक नाती ने अपनी नानी की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी, कि लोगों का कहना था कि वो डायन है। दरअसल विजय की पत्नी हमेशा बीमार रहती थी, किसी तांत्रिक से पूछा तो बताया गया कि नानी डायन है, इसीलिए पत्नी बीमार रहती है। और विजय ने डायन के नाम पर हत्या कर दी और उसे इस बात का अफसोस तक नहीं। दरअसल डायन के नाम पर औरतों के साथ जुल्म करने वाले लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे ऐसा करके इस सामाजिक बीमारी को और बढ़ावा ही दे रहे हैं। झारखंड वो राज्य है जहां पर डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 में ही लागू हो गया था। उसके बाद भी इस राज्य में डायन बताकर महिलाओं को मारने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। यहां खासकर अकेली रह रही महिलाओं को डायन का नाम देकर निर्वस्त्र कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है या फिर सिर मुंडवाकर मुंह काला कर गांव में घूमाया जाता है। कई बार तो गांव से निकाल भी दिया जाता है।
हालांकि यहां राज्य सरकार जागरुकता अभियानों का दावा कर रही है। जबकि आंकड़ों की मानें तो 2001 से अब तक यहां पर सवा पांच सौ महिलाओं की डायन या बिसाही करार देकर हत्या की जा चुकी है। यह तो वो आंकड़े हैं जो दर्ज हुए हो। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2001 से लेकर 2016 तक झारखंड में 523 महिलाओं को डायन करार देकर मारा जा चुका था। इन वर्षों में सबसे ज्यादा राज्य में 2013 में 54 महिलाओं को डायन-बिसाही करार देकर मार डाला गया था। आदिवासी बहुल इस राज्य में 2016 में 27 महिलाओं को डायन बताकर उनकी हत्या की गई।

इन जिलों में डायन का खौफ
डायन के नाम पर झारखंड के रांची, खूंटी,सरायकेला,गुमला, देवघर लोहरदगा और लातेहार में सबसे ज्‍यादा महिलाएं हत्‍या की शिकार हुई हैं। सरायकेला में डुमरा एक ऐसा गांव है जहां विधवा और बुजुर्ग महिलाओं को डायन बिसाही के नाम पर प्रताड़ित करना आम बात है। वहां आधी रात को ग्रामीण ढोल नगाड़ों के साथ महिलाओं को डायन के नाम पर परेशान करते हैं।

जानकारों की मानें तो इस प्रथा को वो लोग बढ़ावा देते हैं, जो अकेली रह रही महिला का या तो गलत फायदा उठाना चाहते हैं या फिर जमीन हड़पना चाहते हैं। इस क्षेत्र में जितनी भी स्वयंसेवी संस्थाएं काम कर रही हैं। उनका यही कहना है कि ज्यादातर मामलों में महिला की जमीन को लेकर डायन बताकर हत्या की जाती है।