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गांव-गांव होलिका दहन ढूंढ़ोत्सव की मची धूम

जिले भर में रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास से मनाया गया। गुरुवार को गांव-गांव में होलिका दहलन के आयोजन हुए वहीं शुक्रवार को धुलण्डी पर लोगों ने एक दूसरे को रंगो से सराबोर किया।

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Moti ram

Mar 07, 2015

जिले भर में रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास से मनाया गया। गुरुवार को गांव-गांव में होलिका दहलन के आयोजन हुए वहीं शुक्रवार को धुलण्डी पर लोगों ने एक दूसरे को रंगो से सराबोर किया। क्या बच्चे, क्या बड़े और क्या महिलाएं सभी ने जमकर गुलाल, रंग और पानी से एक दूसरे को सराबोर किया। गेर नृत्य की भी धूम रही।कई स्थानों प ढूंढोत्सव के आयोजन हुए।

ओबरी। बड़ी होली चौक, बस स्टैंड, कलालवाड़ा, हरिजन बस्ती, बुनकर बस्ती, नए बस स्टैंड एवं यादव मोहल्लें में होलिका का पूजन कर दहन किया गया। शुक्रवार को दोपहर में नवजात शिशुओं के मामाओं सहित उनके माता-पिताओं ने होली की प्रदीक्षणा कर नौनिहाल की ढंूढ़ करवाई व दीर्घायु की कामना की।

शाम को बस स्टैंड बाजार में विभिन्न जाति के लोगों ने ढोल की थाप के साथ कंड़ों की राड़ खेली। इसे देखने हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए। इससे पूर्व बस स्टेण्ड के मुख्य बाजार में आदिवासी युवक-युवतियों ने गैर खेली।

नादिया। बुनकर बस्ती में होली का उत्साह देखते ही बना। लोगों ने परस्पर गले मिल कर खुशियां मनाई। रघुनाथ चौराहा पर सभी समाज वर्ग के लोगों ने मिलकर गुलाल लगाई।

धम्बोला। होली धूमधाम से मनाई। बाजार में भीड़ दिखी। शाम को होली चौक, भट्टों की खिड़की, मंदिर चौक, घांटी मोहल्ला, यादव बस्ती में होलिका दहन किया। यहां पर बच्चों का ढूंढोत्सव की परम्परा का भी निर्वहन किया। रंगोत्सव भी उत्साह से मनाया।

गलंदरपाल व पांचमहुड़ी गांव गैर खेली। इसमें पाट तलाई, तलाब फला, गांव फला, पांच महुडी, काकरी डूंगरी गांवों से फागुन के गीत गाते हुए हाथों मे ढोल व कुंडी लेकर पहुंचे। इस मौके पर कृषि उपनिदेशक गौरीशंकर कटारा, सरपंच राजकुमार कटारा, पांच महुडी सरपंच संगीता देवी कोटेड, पसस उदयलाल कटारा, रामलाल कटारा, राजेन्द्र कटारा आदि शामिल हुए। गोवर्धननाथ मंदिर में फुलडोल उत्सव के दर्शन हुए।

थाणा। गांव में दिनभर फाग गीतों की धून सुनाई दी। महिलाओं ने ढंूढोत्सव के तहत हुवारियां बनाई। महिलाओं ने होलिका पूजन किया। गेरियों ने गांव में घुम कर कंडे एकत्रित किए। छोटे बच्चों ने गादलियां भी बनाई। गांव में एक साथ दो हालिका दहन किया। इसे डोकरा-डोकरी कहते हैं।
मध्य में एक लकड़ी का डंड़ा खडा कर होलीका मुर्हत के अनुसार दहन किया जाता है। लकड़ी का डंड़ा आधा जलने पर गांव का साहसी युवक जलती होलिका में कुद कर उस डंड़े को लेकर भागने की कोशिश करता है, तो अन्य खड़े युवक उसे गोबर के कंड़े मारते हैं। इनसे बचता हुआ लकड़ी के डंड़े को पास की नदी या कुएं में फेक आता है।

आसपुर। होली क्षेत्र सहित ग्राम्यांचलों में शान्तिपूर्ण एवं धूमधाम से मनाई। गुरुवार रात्रि को आठ से 11 बजे तकहोलिका दहन कर फागोत्सव मनाया। नन्हे नोनिहालो को होली की सात परिक्रमा कर ढूंढाया गया। इससे पूर्व मातृशक्ति ने नवान्न एवं अष्टद्रव्य से होली का पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। शुक्रवार को धूलण्डी एवं रंगोत्सव की धूम रही।

युवाओ ने ढोल की थाप के साथ गैर नृत्य एवं महिलाओं ने मटकी नृत्य कर फागोत्सव के आनंद को बहुगुणित किया। शनिवार को जमाईबीज धूम धाम से मनाई।

पीठ। कस्बे में वीरेन्द्रसिंह ने पंडित मनोहरलाल, सीमलवाड़ा में भुपालसिंह चौहान ने पंडित गौतमलाल दीक्षित के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना कर अग्रि प्रज्ज्वलित की। होलिका दहन से पूर्व महिलाओं ने ठंडी होली पूजन कर परिक्रमा की। होलिका दहन के बाद इस वर्ष होली पर्व से पूर्व जन्मे नवाकुंरों एवं परिणय सूत्र में बंधे वर-वधू ने अपने अपने गांवों की होलिका की परिक्रमा कर श्रीफल चढ़ाया। शुक्रवार को धूलण्डी पर लोगों
ने एक दूसरे को रंग लगाया।

गैंजी। क्षेत्रभर में रंगोत्सव धूमधाम से मनाया। गांव के होली चौक पर ढोल नगाड़ों की गूंज के बीच होलिका प्रज्ज्वलित की।
सामूहिक ढूंढोत्सव हुए। विवाह के लंबे अरसे बाद एक साथ तीन बेटियां होने पर गावं के गटूलाल दर्जी ने तीनों पुत्रियों की ढूंढ की। शुक्रवार को धुलण्डी की धूम रही। समीपवर्ती विकासनगर व सालमपुरा में भी होली व धुलण्डी हर्षोल्लास से मनाए गए।

चीखली। पुराने बस स्टैंड पर स्थित होली चौक पर दहन किया। नवजात शिशुओं को प्रथम होली पर ढूंढाने की परंपरा का भी निर्वाह किया। महिलाओं ने मंगलगान के बीच परंपरागत रुप से बज्ज्चों सहित होलिका के फैरे लगा सुख समृद्धि की कामना की। अगले दिन सुबह से ही युवकों की टोलियों ने रंग लगाया।

करावाड़ा। गांव सहित क्षेत्र में दो दिवसीय होलिकोत्सव परम्परागत ढंग से मनाया गया। लोगों ने परस्पर रंग लगाते हुए शुभकामनाएं दी।
गरियता। गांव के लक्ष्मीनारायण मंदिर चौराहा पर ढोल-ढमाकों के साथ ग्रामीणों ने होली खेली। महिलाओं ने नृत्य किया। मंदिर कमेटी का गठन हुआ। अगले दिन धूलण्डी पर लोगों ने परस्पर रंग लगाया।

रामसौर। गांव सहित क्षेत्रभर में होलिकोत्सव धूमधाम से मनाया। क्षेत्र में शुक्रवार को ढूढोत्सव व शनिवार को धुलण्ड़ी खेली। लक्ष्मी नारायण मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण, गायत्री माता एवं शिव मंदिरों में होली के उपलक्ष्य में भोगीलाल सेवक ने विशेष सजावट की।

सूरजगांव। गांव सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में होलिकोत्सव धूमधाम से मनाया। गौरेश्वर आश्रम में भी विधि विधान से पूजा अर्चना हुई। दीवड़ा छोटा के लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में गैर खेली। गांव में सुख-समृद्धि की कामनार्थ प्राचीन परम्परा का भी निर्वहन किया। गांव में नवयुवक मण्डल व महिलाओं ने उमराई माता मंदिर परिसर में शामिल हुई तथा धूलेण्डी खेली।

साबला। गांव सहित क्षेत्र भर में दो दिवसीय होलिकोत्सव हर्षोल्लास से मनाया। पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ढूंढोत्सव कार्यक्रम मनाया। गांव के अम्बिका चौक में महंत अज्ज्युतानन्द महाराज ने पूजन किया।

पूंजपुर। गांव सहित क्षेत्र भर के गांवों में होलिका पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने होलिका का पूजा अर्चना की। वहीं पुरूषों ने कंडो की राड खेली व गैर नृत्य किया। पर्व के तहत शनिवार को बच्चों युवाओं सहित लोगो ने जमकर रंग लगाकर धूलंडी पर्व मनाया।

असमाजिक तत्वोंं ने की तोडफ़ोड़
पूंजपुर। बस स्टैंड पर स्थित होटलों व दुकानों के बाहर सीमेंट के बने स्टेण्ड को असमासजिक तत्वों द्वारा तोडफोड कर नुकसान पहुंचाया। इस पर ग्रामीण व्यापार संघ ने भी निन्दा की।

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रास्तापाल में तिरंगा गेर नृत्य मेला
पीठ। रास्तापाल में फागोत्सव पर होने वाले 'तिरंगा गैर नृत्य मेला' हुआ। डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गांव में शिक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीद नानाभाई खांट, वीरबाला कालीबाई की याद में लगने वाले तिरंगा गैर नृत्य मेला में आसपास के गांवों के ग्रामीण उत्साह से शामिल हुए।

मेले में तीन सौ से अधिक ढोलों से समूचा माहौल उत्साहित बना। इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ताराचंद भगोरा, जिला परिषद सदस्य, मनोज आमलिया, सरपंच रुपचंद भगोरा सीमलवाड़ा, गीतादेवी बरंडा रास्ता, तारादेवी कटारा खरपेडा, पंसस संजय कलासुआ, रमणलाल डामोर शामिल हुए।