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विदेश में देसी दीयों से जगमग होगी दीपावली, लाखों दीपक तैयार

जयपुर. शहर की गोशालाओं में गोबर से बनाए गए इकोफ्रेंडली दीयों की मांग देश के विभिन्न शहरों के साथ ही विदेशों में भी है। इस कारण दिवाली पर दुनिया के कई देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के घर-आंगन इन दीपकों से रोशन होंगे। राजधानी से करीब 20 लाख दीये निर्यात किए गए हैं।

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cow dung lamps : Diwali to be lit up with cow dung lamps, lakhs of lamps prepared

जयपुर. शहर की गोशालाओं में गोबर से बनाए गए इकोफ्रेंडली दीयों की मांग देश के विभिन्न शहरों के साथ ही विदेशों में भी है। इस कारण दिवाली पर दुनिया के कई देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के घर-आंगन इन दीपकों से रोशन होंगे। राजधानी से करीब 20 लाख दीये निर्यात किए गए हैं। सांगानेर स्थित पिंजरापोल गोशाला परिसर में बने आर्गेनिक पार्क में महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य इन दीयों को तैयार करने में जुटी हैं। इस्तेमाल के बाद इन्हें बगीचे व गमले में डाला जा सकेगा, जिससे कि बाद में बगीचे की शान बढ़ेगी। इन दीयों को तैयार करते समय इनमें तुलसी, नीम, अश्वगंधा सहित अन्य औषधीय पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी व आईआईएएएसडी के सहयोग से बने दीपकों को भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ की ओर से बाजार में उपलब्ध करवाया जा रहा है। अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि चार डिजाइन में बने दीये की कीमत दो से लेकर दस रुपए तक है।

इसके अलावा लक्ष्मी जी व गणेश जी की मूर्ति सहित कई तरह की कलात्मक चीजें भी बनाई है।

गो संरक्षण के लिए लिखे संदेश
अध्यक्ष मोनिका गुप्ता ने बताया कि 2.5 किलो गोबर के पाउडर में एक किलो प्रीमिक्स पाउडर व गोंद मिलाने के साथ ही गीली मिट्टी की तरह छानने के बाद इसे हाथ से गूंथा जाता है। पीली सरसों, वृक्ष की छाल, एलोवेरा, मेथी और इमली के बीज मिलाए जाते हैं। मशीन से 20 महिलाएं रोजाना 3000 दीपक बना रही है। जयपुर सहित तेलंगाना, गुजरात, दिल्ली व हरियाणा के साथ ही अमरीका व हांगकांग सहित छह देशों में ये दीये भेजे गए हैं।

हिंगोनिया गौ पुनर्वास केंद्र में भी कृष्ण बलराम गौ सेवा ट्रस्ट की ओर से गोबर से दीये बनाए जा रहे हैं। रघुपति दास ने बताया कि जगतपुरा सहित आसपास की जगहों पर इनका वितरण किया जा रहा है। इन पर गो संरक्षण से जुड़े कई संदेश भी लिखे गए हैं।