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आखिर मेरी क्या गलती थी मां… तीन साल के मासूम की तड़प तड़प कर हो गई मौत, मां पिता के हाथों में ही सांसे टूट गई… नहीं मिला इलाज

आखिर बच्चे को वहां से कहीं लेकर जाते इससे पहले ही उसने हाथों में ही दम तोड़ दिया। अब घर में कोहराम मचा हुआ है। माता पिता की हालत खराब है।

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Jalore News

जयपुर
राइट टू हेल्थ बिल विरोध के दृष्परिणाम सामने आ रहे हैं। लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। खासतौर पर बच्चों के इलाज में जरा सी देरी उनकी मौत का कारण बन रही है। पिछले दिनों सीकर जिले से चार महीने के बच्चे रॉबिन की मौत की सूचना आई थी। माता पिता की एनवर्सरी के दिन ही बच्चे की जान चली गई थी। उसे सीकर मे इलाज नहीं मिला था तो उसे जयपुर रेफर किया था। जयपुर में भी समय पर इलाज नहीं मिला था। इसी तरह का एक और मामला जालोर जिले के आहोर क्षेत्र से सामने आया है। दरअसज इलाज नहीं मिलने के कारण तीन साल के बच्चे धनपत सिंह की मौत हो गई। उसके माता पिता और ताउ उसे लेकर एक से दूसरे अस्पताल जाते रहे और नतीजा ये रहा कि माता पिता के हाथों में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया उसकी सांसे उखड़ गई। परिवार में कोहराम मचा हुआ है। हांलाकि सरकारी अस्पताल के शिशु रोक्ष विशेषज्ञ मुकेश चौधरी का कहना है कि बच्चा निमोटिक इंफेक्टिव था, इसलिए उसे रेफर किया था।

धनपत सिंह के पिता विक्रम सिंह और ताउ दलपत सिंह ने बताया कि बच्चे को मंगलवर को मातृ शिशु स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। वहां से बच्चे को रेफर कर दिया गया। ताउ दलपत सिंह ने कहा बच्चे को बुखार था। उसे लेकर तीन से चार निजी अस्पताल गए। सरकारी अस्पताल गए। लेकिन हीं सही तरीके से इलाज नहीं मिला। उसके बाद हालात ज्यादा खराब हुई तो उसे मंगलवर को जालोर के मातृ शिशु अस्पताल लेकर गए। वहां पर इमरजेंसी में भर्ती तो कर लिया गया लेकिन डॉक्टर हड़ताल पर थे। शिशु रोग विशेषज्ञ मुकेश चौधरी को किसी ने सूचना दी तो वे आए और बच्चे को रेफर कर चले गए। वहां से बच्चे को कहां लेकर जाएं.... इस बारे में उन्होनें कुछ नहीं कहा। आखिर बच्चे को वहां से कहीं लेकर जाते इससे पहले ही उसने हाथों में ही दम तोड़ दिया। अब घर में कोहराम मचा हुआ है। माता पिता की हालत खराब है।