
जयपुर। प्रोफेसर डीपी शर्मा जो कि वर्तमान में जिनेवा स्विट्जऱलैंड स्थित युनाइटेड नेशन्स की इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन के अंतर्राष्ट्रीय कंसलटेंट/सलाहाकार (सूचना तकनीकी) के रूप में कार्यरत हैं को उनके द्वारा साइबर दुनियां में शिक्षा, ग्रीन कंप्यूटिंग एवं कम्युनिकेशन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किये गए उल्लेखनीय कार्यों लिए "शांतिदूत इंटरनेशनल अवार्ड" से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व यह अवार्ड परंपरागत तरीके से शांति के क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाता रहा है जबकि यह अवार्ड पहली बार राजस्थान के किसी प्रोफेसर को तकनीक के माध्यम से शांति स्थापना के लिए दिया गया है।
'वर्ल्ड पीस मूवमेंट' द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रति वर्ष उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में शांति एवं चुने हुए प्रोफेशन के माध्यम से मानव कल्याण, राष्ट्र कल्याण या समाज कल्याण के क्षेत्र में असाधारण कार्य किये हों। प्रोफेसर सिद्धेश्वर प्रसाद (पूर्व गवर्नर त्रिपुरा एवम पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार) की अध्यक्षता आयोजित वल्र्ड पीस मूवमेंट ने अपनी साधारण सभा की मीटिंग में इस अवार्ड की घोषणा सितम्बर 2017 में की थी जिसे आज भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर रविंद्र प्रसाद (पूर्व वाईस चांसलर चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी एवं मूवमेंट के वर्तमान सचिव) एवं लायंस इंटरनेशनल के गवर्नर श्री दिलीप तोषनीवाल ने एक रामेश्वरम कन्वेंशन सेण्टर भीलवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन 'समर्पण से सेवा' में प्रदान किया। प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह अवार्ड इससे पहले विश्व शांति कार्यकर्ता एवं नेशनल मंडेला की सहयोगी, महात्मा गाँधी जी की 'ग्रांडडॉटर' इला गाँधी, पद्म भूषण (जो कि पूर्व मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट साउथ अफ्रीका हैं), जाने माने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता एस एन सुब्बाराव, वर्तमान केंद्रीय ह्यूमन रिसोर्स मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह, पूर्व लोक सभा अध्यक्ष श्री रवि राय, डरबन के विश्व प्रसिद्ध डॉक्टर नर्वदा सिंह एवं म्यानमार के विश्व विख्यात हिस्टोरियन प्रोफेसर ऑन सान्ग तुंग को दिया जा चुका है।
प्रोफेसर डीपी शर्मा को यह अवॉर्ड दिव्यांगता के बावजूद साइबर स्पेस में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से होने वाले अपराधों की रोकथाम एवं ग्रीन इन्फर्मेशन टेक्नालजी के क्षेत्र में किये गये उल्लेखनीय अवेयरनेस कार्यों के लिये दिया गया, जिनमें साइबर स्पेस में होने वाली हेट स्पीच, धार्मिक वायरल उन्माद, इलेक्ट्रॉनिक रेडिएशन, मोबाइल रेडिशन्स एवं ग्रीन पीस इन साइबर वल्र्ड प्रमुख हैं। प्रोफेसर शर्मा ने धौलपुर जिले के ग्रामीण परिवेश से शिक्षा प्राप्त कर डेढ़ दजऱ्न से अधिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पुस्तकों का लेखन किया एवं 37 देशों में आयोजित इंटरनॅशनल कॉन्फरेन्सस में कीनोट स्पीच शिक्षा एवं सूचना तकनीकी को शांति, ग्रीन कंप्यूटिंग एवम ग्रीन पीस से जोडक़र दिये। इससे पहले उन्हें सामाजिक बहादुरी के लिये प्रतिष्टित 'रेड एंड वाइट का बहादुरी राष्ट्रिय अवॉर्ड' 2002 में, सरदार पटेल लाइफटाइम अचीवमेंट इंटरनेशनल अवार्ड (सरदार रत्न ) -2015 एवं प्रेसिडेंटिअल इंटरनेशनल अवार्ड -2016 के साथ कुल 47 अवॉड्र्स एवं सम्मान पत्रों से नवाजा जा चुका है।
Published on:
26 Feb 2018 04:35 pm
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