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प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू, जयपुर के ढिंढोल से शुरुआत

देश में ड्रैगन फ्रूट की खेती में जल्द ही राजस्थान का भी नाम होगा। गुरुवार को क्षेत्र के ढिंढोल गांव में प्रायोगिक तौर पर इस खेती की शुरुआत प्रदेश के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी की मौजूदगी में शुरू की गई है।

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Abhishek Sharma

Apr 07, 2016

dregon fruit

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देश में ड्रैगन फ्रूट की खेती में जल्द ही राजस्थान का भी नाम होगा। गुरुवार को क्षेत्र के ढिंढोल गांव में प्रायोगिक तौर पर इस खेती की शुरुआत प्रदेश के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी की मौजूदगी में शुरू की गई है। सफल परिणाम रहे तो महाराष्ट्र, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के बाद राजस्थान भी इसमें शामिल हो जाएगा।
आर्थिक स्थिति होगी सुदृढ़
प्रदेश में पहली बार ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत कृषि मंत्री ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ढिंढोल (बस्सी) कृषि फार्म में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने एवं विभिन्न बीमारियों से पीडि़तों को राहत पहुंचाने के मकसद से की। इस मौके पर मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में जैतून व पिंडखजूर के बाद ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों की तकदीर बदलेगी।

कई देशों में बड़े स्तर पर होती है इसकी खेती
श्रीलंका, वियतमान, इजरायल, थाइलैण्ड आदि देशों में इसकी खेती अच्छे स्तर पर होती है। भारत में भी महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंधप्रदेश में डे्रगन फ्रूट की खेती की जा रही है। राजस्थान में प्रायोगिक तौर ढिंढोल (बस्सी) से इसकी शुरुआत की गई। साथ ही टोंक, कोटा व थड़ोली, झुंझुनूं में भी यह फल उगाया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो किसानों को अनुदान देकर इस खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।
150 से 200 रुपए किलो है फल की कीमत
कृषि मंत्री ने बताया कि बस्सी में तीन प्रकार के किस्मों के ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें 18 माह में फल आने लगते हैं। एक पौधा 20 से 30 किलोग्राम तक फल देता है। बाजार में एक किलो की कीमत 150 से 250 रुपए तक है। इस खेती में सबसे ज्यादा खर्चीला खेत में पिलर खड़े करने का होता है। इन्हीं के सहारे ये पौधे बढ़ते हैं और ड्रिप सिस्टम से सिंचाई होती है।
विटामिन व मिनरल्स भरपूर
इस फल के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल, ऑर्थराइटिस, डायबिटीज, अस्थमा, एंजींग जैसी बीमारियां दूर होती हैं। इस फल में विटामिन एवं मिनरल्स भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। साथ ही जैल, क्रीम भी बनती है।