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DRDO की जोधपुर लैब ने तैयार किया ऐसा यंत्र जो रूस और यूक्रेन हमले में आएगा काम

DRDO Jodhpur Water Poison Detection Kit: रूस और यूक्रेन बीच परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। इसी बीच भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO जोधपुर लैब ने एक ऐसा यंत्र तैयार किया है जो कि किसी भी हमले के वक्त साफ और सुरक्षित पानी अपने सैनिकों को उपलब्ध करा सकता है। फिर चाहे वह रासायनिक हमला हो या फिर जैविक। रेडियोलॉजिकल हो या फिर परमाणु हमला। डीआरडीओ का यह यंत्र एक घंटे में 6000 लीटर तक साफ पानी जवानों को उपलब्ध करा सकता है।

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DRDO Jodhpur Water Poison Detection Kit: रूस और यूक्रेन बीच परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। इसी बीच भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO जोधपुर लैब ने एक ऐसा यंत्र तैयार किया है जो कि किसी भी हमले के वक्त साफ और सुरक्षित पानी अपने सैनिकों को उपलब्ध करा सकता है। फिर चाहे वह रासायनिक हमला हो या फिर जैविक। रेडियोलॉजिकल हो या फिर परमाणु हमला। डीआरडीओ का यह यंत्र एक घंटे में 6000 लीटर तक साफ पानी जवानों को उपलब्ध करा सकता है।

युद्ध के समय पानी हो जाता है जहरीला
युद्ध के समय अगर रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल या फिर परमाणु हमला होता है तो वह सबसे पहले पानी को जहरीला बना देता है। पानी जहरीला हुआ कि 24 से 48 घंटे के अंदर कोई भी सेना घुटनों पर आ जाएगी। ऐसे में डीआरडीओ की डिफेंस लैब जोधपुर ने CBRN यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर हमले से सुरक्षा देने के लिए विशेष पानी साफ करने का संयंत्र बनाया है।

लद्दाख में है तैनात
भारतीय सेना के लिए डीआरडीओ ने 10 प्रोटोटाइप सिस्टम बनाकर एक सिस्टम लददाख के तंगत्से में तैनात किया गया था। यह सिस्टम जमीनी या फिर रेगिस्तानी इलाकों में ही बेहतर काम कर सकता था। ऐसे में अब इसका अपग्रेड वर्जन आया है। वह माइनस 20 से नीचे भी काम करेगा। इस संयंत्र को एलएसी के बहुत करीब भी तैनात किया जा सकता है।


एक घंटे में 6000 लीटर पानी साफ
सैनिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में यह संयंत्र बहुत सक्षम है। अगर पानी में किसी तरह की सीअीआरएन अशुद्धि है तो यह 1 घंटे में 2500 लीटर साफ पानी और नहीं है तो यह 6000 लीटर पानी साफ कर सकता है। भारतीय सेना ने इस संयंत्र का परीक्षण पैंगोंग झील के पास भी किया है।

सेना और वायुसेना ने की मांग
इस संयंत्र के लिए भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने मांग की थी। दरअसल युद्ध के समय दुश्मन पानी में जहर मिलाने की साजिश करता है। ऐसे में इससे निपटने के लिए ऐसे संयंत्र की जरूरत थी। वायुसेना और सेना ने कुल 54 संयंत्र का आर्डर दिया है। भारतीय सेना को ऐसे 244 संयंत्र की जरूरत है।