25 जुलाई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

(पेज 2 लीड) सूखे की मार, उजड़ रहे तांडे: सूखे ने छीनी रोजी-रोटी, पलायन को मजबूर उत्तर कर्नाटक

जयपुर

image

Newsdesk

Jul 25, 2026

Rajasthan

B
B
B
B
Bबल्लारी.B उत्तर कर्नाटक में कमजोर मानसून और सूखे जैसे हालात का सबसे अधिक असर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। बल्लारी और विजयनगर जिलों के तांडा (बंजारा बस्तियों) से 5,000 से अधिक लोग रोजगार की तलाश में अन्य जिलों और राज्यों की ओर पलायन कर चुके हैं। इस वर्ष सामान्य मौसमी पलायन की तुलना में स्थिति कहीं अधिक गंभीर बताई जा रही है, क्योंकि पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती चौपट हो गई है और गांवों में रोजगार के अवसर लगभग समाप्त हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार खेतों में बुवाई नहीं हो सकी या जहां बुवाई हुई, वहां फसल बारिश के अभाव में सूखने लगी। ऐसे में परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। मजबूरी में हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में पलायन कर रहे हैं। पलायन करने वाले अधिकांश परिवार बेंगलूरु, मैसूरु, मंड्या सहित तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा के विभिन्न शहरों में निर्माण कार्य, कृषि मजदूरी, ईंट-भ_ों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करने के लिए जा रहे हैं। कई परिवार अपने छोटे बच्चों को भी साथ ले गए हैं, जबकि अनेक गांवों में केवल बुजुर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चे ही बचे हैं।B
B
B
B
Bअब यह विकल्प नहीं, मजबूरी हैB
बंजारा समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि हर वर्ष कुछ लोग मौसमी रोजगार के लिए बाहर जाते हैं, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। बारिश नहीं होने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर खत्म होने से पलायन अब विकल्प नहीं बल्कि जीवित रहने की मजबूरी बन गया है। समुदाय के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अधिक दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सूखा राहत राशि का समय पर वितरण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि लोगों को गांव छोडऩे के लिए मजबूर न होना पड़े।B
B
B
B
B
B
Bसरकार ने राहत का दिया भरोसाB
प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार सूखे की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और रोजगार सृजन योजनाओं को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थिति का आकलन किया जा रहा है।B
B
B
B
B
B
Bअन्य जिलों में भी बढ़ा पलायनB
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल बल्लारी और विजयनगर तक सीमित नहीं है। यादगिर, रायचूर और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के अन्य जिलों से भी कमजोर मानसून के कारण समय से पहले बड़े पैमाने पर पलायन की खबरें सामने आ रही हैं। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और ग्रामीण रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो आने वाले दिनों में पलायन का दायरा और बढ़ सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर इन क्षेत्रों में लगातार दूसरे वर्ष कमजोर मानसून ने किसानों और खेतिहर मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर राहत, रोजगार और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ही इस संकट का स्थायी समाधान हो सकता है।


.........B
B
Bपांच दशक से हो रहा पलायन B
बंजारा समुदाय के बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र, गोवा, मंड्या सहित विभिन्न शहरों की ओर पलायन करते हैं। इनमें अधिकांश परिवार गन्ने की कटाई और अन्य दिहाड़ी कार्यों से जुड़े होते हैं। कई परिवार पूरे वर्ष वहीं रहकर मजदूरी करते हैं। अनेक बार मजदूरों को ट्रकों में ठूंसकर ले जाया जाता है, जिसके कारण सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। पलायन के दौरान गांव लगभग सूने हो जाते हैं और वहां केवल बुजुर्ग ही रह जाते हैं। सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है। परिवार के साथ पलायन करने वाले अनेक बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि पिछले लगभग पांच दशकों से बंजारा समुदाय के सामने एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो इस मजबूरी भरे पलायन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।B
B
B- प्रोफेसर सीताराम के. पवार, शिक्षाविद एवं बंजारा समुदाय के प्रतिनिधि, धारवाड़।B