
बोरवेल की अनुमति में ऐसे चल रही धांधली
जयपुर।
प्रदेश के सभी जिलों में सूख चुके ट्यूबवैल्स में से कुछ टयूबवैल का चयन कर उन स्थानों पर भू—जल पुर्नभरण के हिसाब से योजना तैयार की की जाएगी और इसका अध्ययन होगा। इस अध्ययन के आधार पर ऐसा मॉड्यूल विकसित करने का प्रयास होगा, जो भविष्य में खोदे जाने वाले नए ट्यूबवैल्स एवं हैंडपम्प वाले स्थानों पर भू-जल पुर्नभरण और उनके लम्बे समय तक संचाालित होने में मददगार बनें।
जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव ने सोमवार को जल एवं स्वचछता सहयोग संगठन कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद बताया कि प्रत्येक जिले में दस टयूबवैल चिन्हित किए जाएंगे। चार—पांच महीने बाद इनका सर्वे कराया जाएगा।
जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव ने भू-जल विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे प्रत्येक जिले से ऐसे करीब 10 ट्यूबवैल्स चिह्नित करे और उनका ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज की दृष्टि से मॉड्यूल तैयार करें। इन स्थानों का 4-5 माह बाद सर्वे कराया जाएगा।
इससे निकलकर आने वाले नतीजों के आधार पर जलदाय विभाग भविष्य में नए खोदे जाने वाले ट्यूबवैल्स एवं हैंडपम्पों के प्लान के साथ ही वहां ‘रिचार्ज स्ट्रक्चर‘ की जरूरतों को समाहित करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में ट्यूबवैल्स और हैंडपम्प सूख जाते हैं, ऐसे में यह आवश्यक है कि जब भी नया ट्यूबवैल या हैंडपम्प खोदा जाए जो उसके इर्द-गिर्द वाटर रिचार्ज का स्ट्रक्चर भी साथ-साथ बनाया जाए, इसके लिए कांट्रेक्टर के साथ सर्विस एग्रीमेंट में ही ‘टयूबवैल‘ और ‘हैंडपम्प‘ की खुदाई के साथ ही ‘वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर‘ तैयार करने के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।
Published on:
09 Jun 2020 09:02 am
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