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ऊंचे दामों में मांग घटने से टूट देसी घी नरम, 600 रुपए प्रति टिन तक टूट गए दाम

देसी घी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के कारण इन दिनों मांग नहीं के बराबर है। यहीं कारण है कि ब्रांडेड घी के भाव निरंतर टूट रहे हैं।

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ऊंचे दामों में मांग घटने से टूट देसी घी नरम, 600 रुपए प्रति टिन तक टूट गए दाम

ऊंचे दामों में मांग घटने से टूट देसी घी नरम, 600 रुपए प्रति टिन तक टूट गए दाम

देसी घी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के कारण इन दिनों मांग नहीं के बराबर है। यहीं कारण है कि ब्रांडेड घी के भाव निरंतर टूट रहे हैं। एक-डेढ़ माह में देसी घी लगभग 600 रुपए प्रति टिन तक सस्ता हो गया है। देसी घी कारोबारी दिनेश जाजू ने बताया कि लगातार मंदी के चलते देसी घी कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कृष्णा घी वर्तमान में नीचे आकर 8175 रुपए तथा लोटस 9000 रुपए प्रति 15 किलो टिन पर घटाकर बेचा रहा है। डेयरी प्लांटों को मिलने वाले दूध के दाम भी घटकर फिलहाल 53 रुपए प्रति लीटर के आसपास रह गए हैं। इसे देखते हुए घी के दामों में और गिरावट के संकेत हैं।

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घी और बटर का आयात करने की योजना

सरकार एक दशक बाद देश में घी और बटर का आयात करने की योजना बना रही हैं। क्योंकि, देश में पिछले साल दूध उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि खपत में इजाफा हुआ है। दूध उत्पादन में भारत दुनिया में पहले नंबर पर हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में दूध उत्पादन वर्ष 2021-22 में 6.25 फीसदी बढ़कर 22.1 करोड़ टन रहा। उससे पहले वर्ष 2020-21 में यह 20.8 करोड़ टन रहा था। भारत ने आखिरी बार वर्ष 2011 में डेयरी उत्पादों का आयात किया था। अब एक बार फिर देश में खासकर घी और मक्खन के आयात की नौबत आ गई है। इसकी वजह यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान भारत में दूध उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।