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रंगों से वर्चुअल ट्राइऑन तक: एआइ ने बदली फैशन की दुनिया

3डी प्रिंटिंग से कस्टमाइज्ड और सस्टेनेबल फैशन संभव होगा। वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक से ग्राहकों को वर्चुअल ट्राइऑन और शॉपिंग अनुभव मिल रहा है। ब्लॉक चेन तकनीक से फैशन उद्योग में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ रही है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 16, 2026

-प्रो. जीएचएस प्रसाद निदेशक, एनआइएफटी जोधपुर

फैशन इंडस्ट्री में हर सीजन के हिसाब से बदलाव होता है। इसमें वेदर फोरकास्ट की तरह आजकल फैशन फोरकास्ट के लिए पूरे साल रिसर्च वर्क होता है। दो साल पहले ही तय हो जाता है कि आने वाले समय में फैशन में किस कलर का ट्रेंड रहेगा। फैशन इंडस्ट्री में एआइ और मशीन लर्निंग के प्रभाव से डिजाइन, उत्पादन एवं मार्केटिंग में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। एआइ एवं मशीन लर्निंग से डिजाइनर डिजिटल मॉडल बना रहे हैं। इससे कपड़ों के सेम्पल और रंगों का चयन आसान होता है। एआइ एल्गोरिदम्म पैटर्न बनाने में मदद करते हैं। इससे कपड़ों की फिटिंग और आकार की सटीकता बढ़ती है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्म फैशन ट्रेंड की भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं, जिससे डिजाइनर नए ट्रेंड के अनुसार डिजाइन बनाते हैं।

इसकी मदद से ग्राहकों को उनकी पसंद के कपड़े डिजाइन करने की सुविधा मिलती है। एआइ पावर्ड वर्चुअल ट्राइऑन तकनीक ग्राहकों को कपड़े पहनने का अनुभव करा रही है, जिससे उन्हें खरीदने से पहले देखने का मौका मिलता है। ऑटोमेशन और डिजिटल डिजाइन से समय और मेहनत दोनों की बचत होती है। इसके साथ ही आज सस्टेनेबल फैशन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसमें नेचुरल सामग्री जैसे कपास, लिनन, सिल्क और ऊन का उपयोग होता है। रीसाइकल्ड सामग्री जैसे पुराने कपड़ों का उपयोग होता है। साथ ही ऑर्गेनिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्री जैसे कि प्लांट-आधारित पॉलिएस्टर का उपयोग करना होता है। इसमें डिजाइन बनाने के दौरान कपड़े की बर्बादी को कम करने के लिए जीरो-वेस्ट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसमें प्राकृतिक व कम-जहरीले रंगों के उपयोग पर जोर दिया जाता है।

भारत के पारंपरिक प्रिंट जैसे कि ब्लॉक प्रिंट, बाग प्रिंट व कशीदाकारी को आधुनिक आउटफिट्स में शामिल किया जा रहा है। हस्तशिल्प तकनीक बुनाई, कताई और रंगाई का उपयोग आधुनिक वस्त्रों में करके सीधे युवाओं को प्रभावित किया जा रहा है। कई डिजाइनर पारंपरिक सामग्री जैसे कि सिल्क, ऊन और कपास का उपयोग आधुनिक फैशन में बढ़ा रहे हैं। इंटरनेशनल फैशन वीक में प्रमोट भी कर रहे हैं। इस प्रकार पारंपरिक हस्तकला के माध्यम से सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा देना आसान होगा। युवा पीढी के फैशन में आजकल जयपुर के बगरू प्रिंट, सांगानेरी प्रिंट, अंकोला, बाड़मेर एप्लीक का इस्तेमाल हो रहा है। रिसर्च के आधार पर हर साल के कलर घोषित होते हैं और इनसे फैशन के नए ट्रेंड सेट होते हैं। जैसे 2024 के लिए पीच फज कलर, 2025 के लिए मोका मूस कलर और 2026 के लिए ट्रांसफॉर्मेटिव टील कलर की घोषणा हुई है। आज हम स्लो फैशन को अपनाने की बात कर रहे हैं। लोगों से यह अपील कर रहे हैं कि स्लो फैशन को प्राथमिकता दें। इसे कैंपेन की तरह ले रहे हैं। इस तरह फैशन ट्रेंड्स निर्धारित होते हैं। क्योंकि फास्ट पॉपुलर को फॉलो करने से बहुत से प्रोडक्ट तेजी से वेस्ट हो रहे हैं। उधर, भविष्य में एआइ डिजाइन प्रक्रिया में सुधार कर रहा है।

3डी प्रिंटिंग से कस्टमाइज्ड और सस्टेनेबल फैशन संभव होगा। वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक से ग्राहकों को वर्चुअल ट्राइऑन और शॉपिंग अनुभव मिल रहा है। ब्लॉक चेन तकनीक से फैशन उद्योग में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ रही है। इस प्रकार अब कस्टमाइज कपड़े, वर्चुअल फिटिंग का जमाना है। वर्चुअल फैशन अब तेजी से इंडस्ट्री में जगह बना रहा है। जो गेम्स में करेक्टर को ड्रेस पहनाई जाती है उसके ड्रेसेज पर काम शुरू हो गया। सस्टेनेबल फैशन भविष्य की आवश्यकता है। उम्मीद है कि भविष्य में फैशन डिजाइन में और भी नए व अनोखे बदलाव देखने को मिलेंगे।