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दिन में ड्यूटी तो रात में “एनिमल फूड ड्राइव” पर निकल रहे युवा

स्ट्रीट डॉग्स को भोजन तो पक्षियों के लिए परिंडे में रखते हैं बे्रड और बिस्किट देर रात स्कूटर या कार में बिस्किट, टोस्ट ब्रेड, रोटी और पानी लेकर शुरू करते मिशन गर्मी, जाड़ा या बारिश में सड़क के जानवरों या फिर पेड़ों पर परिंदों को भोजन के लिए सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ये बेजुबान हमें अपनी भूख बता नहीं सकते और यों ही रह जाते हैं। शहर के तमाम नौकरीपेशा युवाओं ने पशु-पक्षियों के इस दर्द को महसूस किया।

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दिन में ड्यूटी तो रात में

दिन में ड्यूटी तो रात में

अब वे दिन में ड्यूटी तो रात में इनको भोजन कराने "एनिमल फूड ड्राइव" पर निकल रहे हैं। इसके लिए वे रात 11 से एक बजे तक स्कूटर या कार में बिस्किट, टोस्ट-ब्रेड, रोटी और पानी लेकर निकलते हैं और आस-पास के गली-मोहल्लों में कुत्ते, गाय और बछड़ों को भोजन देते हैं। इतना ही नहीं पार्क में बंधे परिंडों में गिलहरी या अन्य पक्षियों के लिए वे रात में ही खाने की चीजें रख देते हैं। कई युवा ऐसे भी हैं जो रात में घायल पशुओं की मरहम पट्टी भी करते हैं। खास बात है कि यह नेक काम करने वाले लोग नियमित रहते हैं।

बांट लिए गली और मोहल्ले

इस नेक कार्य में जुटे युवाओं ने आपस में अपनी-अपनी गलियां और मोहल्ले भी निर्धारित कर रखे हैं। उनको ऐसा करते देख अन्य लोग भी प्रेरित हो रहे हैं और युवा स्वयं भी आसपास के लोगों को पशु-पक्षियों को खाना खिलाने की अपील करते हैं। हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि अगर स्ट्रीट डॉग्स को खाना-पानी मिले तो डॉग बाइट के मामलों में कमी आ सकती है।

बेजुबानों की रसोई में पांच रुपए में भोजन

सोडाला के गजराज सिंह दो साल से बेसहारा जानवरों के लिए नो प्रॉफिट नो लॉस पर "बेजुबानों की रसोई ***** चला रहे हैं। शहर के सैकड़ों लोग हर दिन इनसे 5 रुपए में अपने कुत्ते, बिल्ली या सड़क के जानवरों के लिए खाना खरीदते हैं। अभी तक वे सवा लाख स्ट्रीट एनिमल को मुफ्त में भोजन करा चुके हैं। सर्दी में ये डॉग्स को कंबल और वैक्सीनेशन उपलब्ध नि:शुल्क करवाते हैं। उनकी टीम रोज 500 से ज्यादा फूड पैकेट वितरित करती है।

"डॉग मैन ***** कहलाते हैं गुलशन

राजापार्क निवासी गुलशन भाटिया ने बताया कि वे रोज रात को तिलक नगर, राजापार्क, गुरुनानकपुरा, झालाना डूंगरी में सड़कों पर जानवरों को नियमित दूध और ब्रेड खिलाते हैं। वे रात 11 बजे से फूड ड्राइव पर निकलते हैं और स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाते हुए जाते हैं। सर्दी में डॉग्स को बोरी या पुराने कंबल ओढाते हैं। पिछले दो साल से वे डॉग्स को गले में "नियोन ***** कॉलर्स पहना रहे हैं ताकि गाड़ी चालक उन्हें दूर से ही देख लें।

स्ट्रीट डॉग्स का करवा रही है एडॉप्शन

राम गली निवासी आश्मिता मेहता बताती हैं कि वे 9 साल से सड़क के जानवरों की सेवा कर रही हैं। डॉग्स और गाय को नियमित खाना देती हैं। वे स्ट्रीट डॉग्स का एडॉप्शन भी करवाती हैं। उन्होंने खुद एक दर्जन से अधिक कुत्तों को गोद ले रखा है और दूसरों को भी प्रेरित करती हैं। वे सिंधी कॉलोनी, पिंक स्क्वॉयर मॉल, पंचवटी कॉलोनी में नियमित तौर पर खाना देती हैं।

विदेशी छोड़ देसी डॉग को लिया गोद

अशोक चौक निवासी रूचि बजाज हमेशा अपनी गाड़ी में डॉग्स फूड रखती हैं और लेट नाइट फूड ड्राइव के लिए निकलती हैं। वे पिछले 4 साल से बेजुबानों के को भोजन बांट रही हैं। साथ ही उन्होंने फीमेल स्ट्रीट डॉग्स अडॉप्ट कर रखे हैं। वह कहती हैं कि भूख के कारण ही कुत्ते काटते हैं अगर उन्हें भोजन मिले तो वे भी प्यार करते हैं।

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