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150 साल बाद आया ‘चंद्रग्रहण‘ बना ‘भूकंप‘ का कारण! 2018 में यहां फिर से हो सकता है विनाशकारी ‘तांडव‘

भूकंप के वैज्ञानिक मतों को जानें तो पता लगेगा, कि टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने भूकंप पैदा होता है, लेकिन...

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जयपुर

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Punit Kumar

Jan 31, 2018

Super Blue Blood Moon

जयपुर। चंद्र ग्रहण शुरु होने से पहले और सूतक लगने के ठीक बाद ही दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत में दोपहर को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जबकि इस भूकंप का केद्र केंद्र अफगानिस्तान के हिन्दूकुश में था। भारतीय समयनुसार भूकंप दोपहर करीब 12.37 बजे आया। तो वहीं राजस्थान के सीकर, चूरू, झुंझुनूं में भी लोगों ने इस भूंकप के झटके महसूस किए। जबकि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई।

बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ग्रहण को एक तरह से अशुभ और हानिकारक प्रभाव देने वाला माना जाता है। तो वहीं ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस दिन गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। माघ शुक्ल पूर्णिमा पर बुधवार को साल का पहला खग्रास चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। जबकि ऐसा पूर्ण चंद्र ग्रहण लगभग 150 साल बाद आया है। खगोलीय शास्त्र के मुताबिक इस दौरान चंद्रमा धरती के काफी करीब तक आ जाती है। जबकि ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का संबंध भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी होता है।

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भूकंप आने के कारण-

भारत में इस ग्रहण का समय बुधवार को शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा, जो रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। तो वहीं ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले सुबह 8 बजकर 18 मिनट से शुरू हो चुके हैं। ऐसे भूकंप के वैज्ञानिक मतों को जानें तो पता लगेगा, कि जब कभी धरती पर लोगों को भूंकप के झटके महसूस होते है। इसका सीधा कारण पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने से पैदा हुए कंपन के कारण भूकंप आता है, इतना ही नहीं भूकंप के कारण ही सूनामी जैसी आपदाओं का भी जन्म होता है। ज्योतिष के मुताबिक, पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें ग्रहों के प्रभाव से एक जगह से दूसरी जगह खिसकती हैं और आपस में टकराती हैं। तो वहीं भूकंप की तीव्रता प्लेटों पर पड़ने वाले ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर है।

कैसे लगता है चंद्र ग्रहण-

आपकों बता दें कि चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को दर्शाती है, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रतिच्छाया में पड़ जाता है। साथ ही इस दौरान सूर्य , पृथ्वी और चन्द्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आ जाती है। सीधी भाषा कहें तो चंद्रगहण के दिन सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है। ऐसे में इसका सीधा प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है। जबकि धर्म ग्रथों की मानें तो चंद्र ग्रहण का प्रभाव जल और समुद्र दोनों पर पड़ता है। तो वहीं ग्रहण के कारण आपदाओं जैसे-भूकंप, बाढ़, तूफान, महामारी भी आते हैं। हालांकि कुछ का मानना है कि ये सभी बातें केवल भ्रम है। उनका इससे कोई संबंद नहीं होता।

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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ग्रहण का अपना अलग स्थान है। उनका मानव जीवन पर खासा प्रभाव देखने को मिलता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक आ जाती है, तो गुरुत्वाकर्षण सबसे अधिक होता है। यही कारण है कि पूर्णिमा के दिन समुद्र में ज्वारभाटे पैदा होते हैं। इसी तरह चंद्रग्रहण के दिन इसका प्रभाव पृथ्वी पर सबसे अधिक होता है। गुरुत्वाकर्षण के बढ़ने और घटने के कारण ही भूकंप पैदा होते हैं।

खग्रास चंद्र ग्रहण पर एक नजर-

अवस्था - समय
ग्रहण उपच्छाया प्रवेश - दोपहर 4.20 बजे
ग्रहण शुरू - शाम 5.15 बजे
पूर्णता शुरू - शाम 6.21 बजे
ग्रहण मध्य - शाम 7 बजे
पूर्णता समाप्त - शाम 7.38 बजे
ग्रहण समाप्त - रात 8.42 बजे
ग्रहण उपच्छाया अंत - रात 9.40 बज

2018 में यहां आएंगे विनाशकारी भूकंप-

खबरें हैं कि साल 2018 भी एक बार फिर से दुनिया में जमकर तांडव मचाएगा। कहा जा रहा है कि 2018 में भूकंप कई लोगों की जानें ले सकता है। भूकंप की हलचलों पर करने वाली जियोलौजिकल सोसाइटी ऑफ अमरिका ने इस पूरे मामले में चेतावनी जारी की है।

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जियोलौजिकल सोसाइटी के साइंटिस्टों ने कहा है कि पृथ्वी की हलचल में लगातार बदलाव आते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस स्पीड से पृथ्वी घूमती है, उसमें काफी चेंज आ रहे हैं। यही वजह है कि साल 2018 में भूकंप आ सकते हैं। जियोलौजिकल सोसाइटी की रिसर्च में उन इलाकों का पता नहीं चल पाया है, जहां 2018 में भूकंप आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

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