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ई-वेस्ट नहीं बनेगा सिरदर्द, निस्तारण के लिए जनता के साथ कंपनियों की भी जिम्मेदारी

-लागू हो रहे नए ई-वेस्ट नियम, पांच नई श्रेणियां भी बनाई-सोलर पैनल, खिलौने, लेजर, मेडिकल डिवाइस, लेबोरेट्री उपकरण भी शामिल-निर्माता कंपनियों पर सख्ती, 60 प्रतिशत ई वेस्ट का निस्तारण करना होगा-वैज्ञानिक तरीके से ही होगा निस्तारण

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जयपुर

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Umesh Sharma

Feb 02, 2023

ई-वेस्ट नहीं बनेगा सिरदर्द, निस्तारण के लिए जनता के साथ कंपनियों की भी जिम्मेदारी

ई-वेस्ट नहीं बनेगा सिरदर्द, निस्तारण के लिए जनता के साथ कंपनियों की भी जिम्मेदारी

जयपुर। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट अब जनता और सरकार दोनों के लिए सिरदर्द नहीं बनेगा। इसके निस्तारण के लिए बनाए गए नए नियम राजस्थान में अप्रेल से लागू हो जाएंगे। पहली बार है जब ई-वेस्ट श्रेणी में सोलर पैनल, खिलौने, लेजर व मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक्स व लेबोरेट्री उपकरण भी शामिल किए गए हैं। अब इनका निस्तारण भी वैज्ञानिक पदृधति से ही होगा और लोगों को इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिर्वतन मंत्रालय नए ई-वेस्ट नियम बनाए हैं।

इन नियमों का सही ढंग से पालन हुआ तो जनता को कुछ हद तक इस प्राणघातक वेस्ट से निजात मिलेगी। हालांकि, जनता तक ई-वेस्ट की जानकारी कैसे पहुंचाई जाए, इसे लेकर नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि जितना इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट निकल रहा है, उसका 10 प्रतिशत ही निस्तारित किया जा रहा है। ई वेस्ट की 7 श्रेणी बनाई गई है, जिसमें 106 वस्तुएं शामिल की गई हैं।

जहां से लीकेज, उस कड़ी को हटाया..

नए नियमों में डिस्मेंटलर यानि यंत्रों से ई-वेस्ट को अलग करने का काम करने वालों को हटाया गया है। मंत्रालय का मानना है कि यही से ई-वेस्ट गलत हाथों में जा रहा था। डिस्मेंटलर ही अधिकृत की बजाय अनाधिकृत लोगों को ई-वेस्ट सप्लाई कर रहे थे। अब बड़ी मात्रा में वेस्ट निकालने वाले उपभोक्ता यानी बड़े उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड ई-साइक्लर को वेस्ट सौंपना होगा।

निर्माता कंपनियों पर बढ़ाई सख्ती

ई-कचरा निस्तारण की बड़ी जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली कंपनियों को दी गई है। कंपनियों को कहा गया है कि 2024-25 तक बेचे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान के 60 प्रतिशत तक ई-कचरे का खुद निस्तारण करें। इसके 80 प्रतिशत तक ई-कचरे का निस्तारण करना होगा।

आम आदमी को बताएंगे कैसे, यह पता ही नहीं..

ई-वेस्ट से निकलने वाले केमिकल स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक हैं। इसमें मर्करी, आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, सैलेनियम, हेक्सावैलेंट क्रोमियम और फ्लेग रिडार्डेंट्स हैं, जो सांस, फेफड़े का कैंसर और त्वचा संबंधी बीमारियों की वजह बनते हैं। खास बात यह है कि जनता को जागरुक करने के लिए नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में जनता आखिर कैसे जान पाएगी कि ई-वेस्ट से उसके स्वास्थ्य पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इन श्रेणियों में बढ़ाए उत्पाद

सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार उपकरण- 16 से बढ़ाकर 27
उपभोक्ता विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स- 5 से बढ़ाकर 19

ये बनाई नई श्रेणी

बड़े और छोटे विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण-34
विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स-8
खिलौने, लेजर और खेल उपकरण-6
मेडिकल डिवाइसेज-10
लेबोरेट्री उपकरण-2

परेशान करने वाले हालात

-पूरे प्रदेशभर में सालाना 2.11 लाख टन ई-वेस्ट निकल रहा है
-मगर 20 हजार टन के आसपास ही हो रहा है निस्तारण
-अगले दो साल में जयपुर से निकलेगा सालाना 15 हजार टन ई-वेस्ट

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की औसत अवधि

मोबाइल -1 से 3 साल
डेस्कटॉप- 2 से 3 साल
कैमरा- 3 से 5 साल
टेलीविजन, एलसीडी- 5 से 8 साल
रेफ्रिजरेटर- 5 से 10 साल
वॉशिंग मशीन- 5 से 10 साल
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-नए नियम में निर्माता कंपनियों पर सख्ती की गई है, ताकि कंपनियां जो माल बेच रही हैं, उसका निश्चित समयावधि बाद निस्तारण कराए। जहां तक जनता से जुड़ाव की बात है तो इसकी जिम्मेदारी भी कंपनियों को सौंपी गई है।
-बी. प्रवीण, सदस्य सचिव, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल