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राजस्थान: घनश्याम तिवाड़ी के बाद अब इस दिग्गज जाट नेता की BJP में ‘री-एंट्री’ की चर्चा, जानें क्या है वजह?

घनश्याम तिवाड़ी के बाद अब इस दिग्गज जाट नेता की BJP में 'री-एंट्री' की चर्चा, सियासी गलियारों खासतौर से भाजपा में चर्चाएँ शुरू हो गई हैं, नेता-कार्यकर्ता अपने-अपने नज़रिए से इस मुलाक़ात के मायने निकाल रहे हैं।

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Ex Minister Usha Poonia in news after meeting Vasundhara Raje

जयपुर।

पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में पर्यटन मंत्री रहीं ऊषा पूनिया लम्बे समय बाद एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, शनिवार को ऊषा पूनिया ने राजे से उनके निवास पहुंचकर मुलाक़ात की है। जिसे उनके पार्टी में ‘री-एंट्री’ लेने के संकेत मिलने के सन्दर्भ में भी देखा जाने लगा है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ऐसी ही चर्चा दिग्गज नेता रहे घनश्याम तिवाड़ी को लेकर भी हुई थी। हालांकि तिवाड़ी और पूनिया ने स्वयं अभी तक इस बारे में चुप्पी साध रखी है।

पूनिया दे चुकीं हैं वसुंधरा और भाजपा को झटका

पूर्व मंत्री ऊषा पूनिया की वसुंधरा राजे के निवास जाकर मुलाक़ात के बाद सियासी गलियारों खासतौर से भाजपा में चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। नेता-कार्यकर्ता अपने-अपने नज़रिए से इस मुलाक़ात के मायने निकाल रहे हैं। यहाँ तक की पूनिया की पार्टी में री-एंट्री की मंशा से जोड़कर इसे देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व मंत्री वर्ष 2018 के दौरान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़ते हुए पार्टी को ज़बरदस्त झटका दे चुकीं हैं। उन्होंने बगावत करते हुए स्वयं और जाट समुदाय की ऊपेक्षा का खुलकर आरोप लगाया था।

पूनिया ने पार्टी को ऐसे समय पर झटका दिया था जब घनश्याम तिवाड़ी, जसवंत सिंह के बेटे मानवेन्द्र सिंह और हनुमान बेनीवाल सरीखे नेता भी पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर पार्टी छोड़ चुके थे।

जानें कौन हैं ऊषा पूनिया?
पिछली वसुंधरा राजे सरकार के दौरान ऊषा पूनिया को पर्यटन मंत्री की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई थी। वर्ष 2003 में पूनिया ने जाट बाहुल्य नागौर जिले की मुंडवा विधानसभा सीट से बीजेपी टिकट पर चुनाव जीता था। लेकिन वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान पूनिया को बीजेपी ने मुंडवा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का टिकट नहीं मिला। इसके बाद से वे लम्बे समय से बीजेपी संगठन और नेताओं से नाराज रहीं। बाद में इस्तीफा देकर पार्टी से किनारा कर लिया।

ऊषा पूनिया के पति विजय पूनिया भी राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते है। लिहाजा पूनिया परिवार की जाट समुदाय में अच्छी खासी पकड़ बताई जाती रही है।

हनुमान बेनीवाल को हरा चुकी हैं पूनिया
ऊषा पूनिया वर्ष 2003 के दौरान हुए विधानसभा चुनाव में प्रतिद्वंदी रहे हनुमान बेनीवाल को शिकस्त दे चुकी हैं। नागौर की मुंडवा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था। इसमें भाजपा प्रत्याशी रहीं पूनिया ने निकटतम प्रतिद्वंदी रहे हनुमान बेनीवाल को तीन हज़ार से ज़्यादा मतों से हराया था।

ऊषा पूनिया को 39,027 वोट जबकि हनुमान बेनीवाल को 35,724 वोट हासिल हुए थे। भाजपा से टिकिट नहीं मिलने पर बेनीवाल लोकदल पार्टी से मैदान में थे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस प्रत्याशी हबीबुर्रहमान रहे जिन्हें 32,479 वोट मिले।

पति विजय पूनिया की भी है राजनीतिक पैठ
ऊषा पूनिया के पति विजय पूनिया भी राजनीतिक हलकों में चर्चित नेता रहे हैं। वे 1998 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें उन्हें दूसरे नंबर पर रहकर संतोष करना पड़ा। 2018 विधानसभा चुनाव से पहले विजय पूनिया ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

वहीं विजय पूनिया की मां गौरी पूनिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुकीं हैं। वे डेगाना से 1957, 1962 व 1967 में विधायक रहीं। डेगाना क्षेत्र में किलक व मिर्धा परिवार की एंट्री से पहले गौरी पूनिया का ही क्षेत्र में राजनैतिक दबदबा रहा करता था।

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