
फैक्ट चैक : कुष्ठ आश्रम में खराब होती रोटियों का वीडियो सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल
सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया जाता रहता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक कमरे में पड़ी बहुत सी रोटियों को देखा जा सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर यह दावा कर रहे हैं कि कोविड-19 के चलते लॉकडाउन के दौरान सरकार की ओर से बांटी जा रही रोटियों को एक मुस्लिम परिवार ने जमा कर के बर्बाद कर दिया, ताकि कोई और इन्हें न खा पाए। राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच की तो पता चला कि यह दावा गलत है। इस पोस्ट की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई। जांच के अनुसार वायरल पोस्ट का ये दावा फर्जी निकला है। असल में यह वीडियो मेरठ के एक कुष्ठ आश्रम का है, जिसका किसी विशेष समुदाय से कोई ताल्लुक नहीं है।
यह हो रहा वायरल
फेसबुक पर डॉ. महेश शर्मा फैन्स क्लब यूजर ने वायरल वीडियो को शेयर किया है, जिसमें एक व्यक्ति कमरे में घुसता है और जमीन पर पड़ी सूखी हुई रोटियां और पूडिय़ां दिखती हैं। वीडियो के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा है, "ये देखो शांतिदूतों द्वारा क्या हो रहा है, खाना लूटो और उसे खराब कर दो, किसी गरीब को खाना ना पहुंचने दो, ताकि सरकार बदनाम हो और गरीब भूखा मरे! कैसी कौम है ये... सबसे निवेदन है, इनको खाने-पीने का सामान ना दें।" यह वीडियो एक मिनट का है। इस वीडियो को अब तक करीब 3 हजार लोग देख चुके हैं। वहीं करीब 100 से अधिक लोगों ने इसे शेयर किया है।
जांच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच शुरू की। इस वीडियो की जांच के लिए हमने इस वीडियो को ठीक से देखा। वीडियो की शुरुआत में व्यक्ति बोलता है "के पीछे हम एक कुष्ठ आश्रम है, जहां हम सभी अभी-अभी आए और देखा कि यहां अन्न की क्या स्थिति चल रही है..." वीडियो में शुरुआत में ही व्यक्ति बोलता है "हम कुष्ठ आश्रम।' जांच के लिए इस वीडियो के की-फे्रम्स निकाले और फिर उन्हें गूगल रिवर्स इमेज पर 'कुष्ठ आश्रम, फूड वेस्टेज' कीवड्र्स के साथ सर्च किया। हमें एक टीवी का एक यूट्यूब पेज मिला, जिसमें इसी वीडियो के बारे में खबर थी। वीडियो में लिखा था - मेरठ न्यूज 7 कुष्ठ आश्रम और गांधी आश्रम में खाने की बर्बादी, भूखा बताकर समाजसेवी ले जा रहे खाना।" पुष्टि के लिए हमने बात की तो उन्होंने बताया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का नाम नवनीत है और वे एक सोशल वर्कर हैं। नवनीत बालाजी से भी इस वीडियो पर पुष्टि मांगी तो उन्होंने बताया "यह वीडियो मैंने 8 अप्रैल को मेरठ-दिल्ली रोड स्थित होटल मुकुंद महल के पीछे वाले कुष्ठ आश्रम में बनाया था। मैं एक समाजसेवी हूं और मुझे पता चला था कि इस आश्रम में लोगों को लॉकडाउन के दौरान खाने की किल्लत है। ऐसे में जब मैं आश्रम यह जानने पहुंचा कि उन्हें कितने लोगों का खाना चाहिए, मेरे एक सहयोगी ने मुझे बताया कि एक कमरे में उन्होंने बहुत सी पूडिय़ां और रोटियां जमीन पर पड़ी देखी हैं। जब हमने कमरे का दरवाजा खुलवाया तो वहां सूखी पूडिय़ों और रोटियों का अंबार लगा था। असल में बहुत से लोगों ने आश्रम में इकट्ठा खाना भेज दिया था, जिसे आश्रम एडमिन ने वापस करने की बजाय इस कमरे में भर दिया था। यह आश्रम कुष्ठ रोगियों के लिए है। इस वीडियो के साथ सांप्रदायिक एंगल जोडऩा गलत है।"
सच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच शुरू की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कि खाना लेकर उसे खराब कर देना, का सांप्रदायिक मामले से जोडऩा गलत है। असल में यह वीडियो मेरठ के एक कुष्ठ आश्रम का है, जिसका किसी विशेष समुदाय से कोई ताल्लुक नहीं है। इस वीडियो के साथ सांप्रदायिक एंगल जोडऩा गलत है।
Published on:
25 Apr 2020 07:09 pm
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