12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरसों के दामों से किसानों का दम फूला, माल रोका… फिर भी नहीं मिल रहे दाम

आलू और प्याज के बाद अब सरसों के भाव किसानों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं।

less than 1 minute read
Google source verification
musterd_crop.jpg

आलू और प्याज के बाद अब सरसों के भाव किसानों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इस साल किसानों को सरसों की कम कीमत मिल रही है। मंडियों में आवक घटने के बावजूद इसके दामों में गिरावट जारी है। देश की ज्यादातर मंडियों में नई सरसों का भाव एमएसपी 5450 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे चल रहा है। रिकॉर्ड रकबे में बुवाई होने की वजह से पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के अनुमान और जनवरी में खाद्य तेलों के रिकॉर्ड आयात का असर सरसों के भाव पर पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें : जीरे की महंगाई पर धनिये का मरहम, राजस्थान में एक लाख बोरी की आवक

पामोलिन पर ड्यूटी बढ़ाने की मांग

मरुधर ट्रेडिंग के निदेशक अनिल चतर ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए खाद्य तेलों के आयात, खासकर पामोलिन पर ड्यूटी बढ़ाने की मांग की है। चतर ने कहा कि दाम नहीं मिलने के कारण फिलहाल किसानों ने माल रोक रखा है, लेकिन जैसे ही मंडियों में आवक का दबाव बनेगा तो सरसों के भाव और गिरकर सभी मंडियों में एमएसपी से नीचे जाने की आशंका है। पिछले साल की तुलना में किसानों को सरसों के भाव करीब 1500 रुपए क्विंटल कम मिल रहे हैं। सरसों के भाव औंधे मुंह गिरने की वजह देश में इस साल रिकॉर्ड पैदावार के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में छाई सुस्ती है।