
राजस्थान विधानसभा में बजट पेश करतीं वित्त मंत्री दिया कुमारी। फोटो: पत्रिका
जयपुर। राजस्थान का बजट पेश होने के बाद से ही सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष और बजट विश्लेषकों का कहना है कि पहली नजर में यह बजट आकर्षक और उम्मीदों से भरा हुआ दिखता है, लेकिन गहराई से देखने पर कई सवाल खड़े होते हैं। हर साल की तरह इस बार भी घोषणाओं की लंबी सूची तो है, पर उनके धरातल पर उतरने का रास्ता नहीं दिखाई दे रहा।
कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का नाम तक नहीं लिया गया, जबकि कुछ क्षेत्रों का उल्लेख तो हुआ, पर ठोस रणनीति और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव साफ झलकता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह बजट सचमुच विकास की दिशा तय करेगा या फिर कागजों में सिमट कर रह जाएगा।
नेता विपक्ष टिकाराम जूली ने दावा किया कि पिछले दो बजटों की 2718 घोषणाओं में से केवल 900 ही पूरी की गई है, जबकि 284 परियोजनाओं पर तो काम भी शुरू नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 2026 की जमीनी हकीकत से दूर है और जवाबदेही से बचने के लिए 2047 के सपने दिखा रही है।
Published on:
12 Feb 2026 02:33 pm
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