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बेटा और बेटी की शादी एक ही मंडप में करने का सपना पूरा हो रहा था पिता का, लेकिन खुद ही शामिल नहीं हो सके

शादी का कुछ सामान लेने शहर की दुकान से लौट रहे थे कि गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले एक अज्ञात वाहन ने कुचल दिया। यह घटना मंगलवार रात हुई। बुधवार को शादी होनी थी।

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जयपुर। पिता के लिए जीवन का सबसे बड़ा दिन था। बेटा और बेटी की एक साथ शादी हो रही थी। परिवार, खानदान, सब खुश थे, एक बेटी जा रही थी तो बहू के रूप में दूसरी बेटी आ रही थी। लेकिन फेरों से चंद घंटे पहले नीयति ने अजब खेल खेला। शादी का सामान लेकर लौट रहे पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई वह भी मंडप से सिर्फ डेढ़ किलोमीटर पहले। एक अज्ञात वाहन ने इतनी बुरी तरह से रौंद दिया कि लाश के टुकड़े सड़क से चिपके उठाए गए।

बाद में इसकी सूचना जब थाने से घर पहुंची तो माहौल ही बदल गया। परिवार के बड़े लोगों ने यह तय किया कि शादी हो जाने के बाद ही परिवार के लोगों की इसकी जानकारी देंगे। लेकिन बेटी को अनिष्ठ की चिंता सता रही थी, उसके फेरे हो रहे थे और वह अपने पिता का टकटकी लगाए इंतजार कर रही थी, लेकिन पिता नहीं आए। आखिर जब घर में अर्थी पहुंची तो ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था जो रो नहीं रहा हो.....। पूरा घटनाक्रम नागौर जिले डेगाना इलाके का है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

दरअसल बुधवार को डेगाना इलाके में के चांदारूण गांव में रहने वाले दीपक और उसकी बहन ज्योति की एक साथ शादी थी। सारा आयोजन एक ही जगह पर रखा गया था। दीपक और ज्योति के पिता ओम प्रकाश शादी की तैयारियों में व्यस्त थे। शादी का कुछ सामान लेने शहर की दुकान से लौट रहे थे कि गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले एक अज्ञात वाहन ने कुचल दिया। यह घटना मंगलवार रात हुई। बुधवार को शादी होनी थी।

घर में बताया गया कि पिता बीमार हैं और शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। बेटा और बेटी को अनिष्ठ की आशंका था। बेटी फेरों में पिता का इंतजार करती रही गई। दीपक की शादी भारती से हुई और ज्योति की शादी रामवतार से हुई। बुधवार को दोपहर करीब चार बजे गांव के मंदिर में दोनो के फेरे साथ कराए गए। उसके बाद बेटी विदा हुई और बहू घर में आई। बहू के आने के साथ ही घर में पिता की अर्थी पहुंची। कुछ देर बाद बेटी को भी सूचना मिली तो वह भी अपने दूल्हे के साथ घर आ गई। घर में कोहराम मचा हुआ था। बेटा और बेटी पिता की लाश से लिपट कर रो रहे थे और उ नको देखकर पूरा का पूरा गांव आसू नहीं रोक पा रहा था। देर शाम पिता का अंतिम संस्कार किया गया तो पूरा का पूरा गांव शामिल हुआ। ओम प्रकाश की पत्नी की भी दो साल पहले हादसे में मौत हो गई थी।