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कोलकाता. सावन के साथ ही बंगाल में त्योहारों की तैयारियां तेज होने लगी हैं। विश्वकर्मा पूजा, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और इसके बाद काली पूजा जैसे बड़े आयोजनों की मांग को देखते हुए कुम्हारटोली में मूर्ति निर्माताओं ने काम की रफ्तार बढ़ा दी है। संकरी गलियों और छोटे-छोटे कार्यस्थलों में कहीं बांस की खपच्चियों से ढांचा तैयार हो रहा है तो कहीं मिट्टी की परत चढ़ाकर प्रतिमाओं को आकार दिया जा रहा है। यह मौसम मूर्तिकारों के साथ साथ बड़ी संख्या में कारीगरों और सहायक श्रमिकों के लिए मौसमी रोजगार का भी अवसर लेकर आता है। कुम्हारटोली में बनने वाली प्रतिमाएं महानगर और राज्य के अलावा देश के दूसरे हिस्सों तथा विदेशों तक भी जाती हैं। प्रतिमा निर्माण का काम यहां कई महीने पहले शुरू हो जाता है और मानसून तथा शुरुआती शरद ऋतु में इसकी गतिविधियां चरम पर पहुंचती हैं। छोटे और बड़े कारखानों में स्थानीय कारीगरों के साथ मौसमी श्रमिक भी काम से जुड़ते हैं। ऐसे में त्योहारों का कैलेंडर इस पूरे कारोबार के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण आधार बन जाता है।
बरसात बनी बड़ी चुनौती
हालांकि काम को गति देने के साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। लगातार बरसात प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करती है। शिल्पकारों के अनुसार, मिट्टी से तैयार प्रतिमा को सुखाने के लिए पर्याप्त सूखा और हवादार स्थान चाहिए। कुम्हारटोली के अधिकांश कार्यस्थल सीमित जगह वाले हैं। ऐसे में मानसून के दिनों में प्रतिमाओं को सुरक्षित रखना और समय पर सुखाना बड़ी चुनौती बन जाता है। नमी अधिक होने पर मिट्टी की परत सूखने में समय लगता है और काम का अगला चरण भी पीछे खिसकता है। रंग-रोगन और अंतिम सजावट के चरण में भी मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। कारीगरों ने बताया कि जून में कुम्हार टोली में प्रतिमा निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी की आपूर्ति कई सप्ताह तक बाधित रही थी। बाद में आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन इस व्यवधान से उत्पादन काफी पीछे चला गया। इससे अब कम समय में अधिक काम पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।
मूर्ति निर्माण श्रम आधारित प्रक्रिया
मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया अपने आप में श्रम आधारित है। ढांचा तैयार करने से लेकर मिट्टी चढ़ाने, चेहरे और हाथ-पैर की बारीक आकृतियां बनाने, कपड़े पहनाने, रंग भरने और सजावट तक अलग-अलग स्तर पर कारीगरों की जरूरत होती है। त्योहार नजदीक आते ही इन कामों की गति बढ़ती है। स्थायी मूर्तिकारों के अलावा सहायक कारीगर, मिट्टी तैयार करने वाले, ढांचा बनाने वाले, रंग-रोगन से जुड़े श्रमिक और सजावट का काम करने वाले लोगों को भी काम मिलता है। यही वजह है कि त्योहारों का मौसम कुम्हारटोली की स्थानीय अर्थव्यवस्था में रोजगार का बड़ा चक्र पैदा करता है। मजदूरी भी इसी मौसमी मांग के साथ बदलती है। काम बढ़ने पर कुशल कारीगरों की जरूरत बढ़ती है और उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता है। वहीं छोटे कारखानों में काम करने वाले सहायक श्रमिकों के लिए भी यह अतिरिक्त कमाई का समय होता है। हालांकि मजदूरी का कोई एक समान दर सभी कार्यशालाओं पर लागू नहीं होती। काम की प्रकृति, कारीगर की कुशलता, प्रतिमा के आकार और कार्यशाला के आधार पर भुगतान में अंतर रहता है। इसलिए इस क्षेत्र की रोजगार क्षमता को केवल मूर्तियों की संख्या से नहीं, बल्कि उससे जुड़े श्रम और सेवाओं के व्यापक दायरे से समझना जरूरी है।
समय और संसाधनों के बीच संतुलन की चुनौती
प्रतिमा निर्माताओं का कहना है कि एक ओर मौसम के कारण काम की गति धीमी होती है, वहीं दूसरी ओर समय पर प्रतिमाएं तैयार करने के लिए कारीगरों को बाद में अतिरिक्त घंटे काम करना पड़ सकता है। आयोजन की निश्चित तारीख के कारण उत्पादन की समय-सीमा को अनिश्चितकाल तक आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। प्रतिमाओं की आपूर्ति समय पर करनी होती है। इसलिए शुरुआती देरी का दबाव अंतिम चरण में काम के घंटों और श्रम की मांग बढ़ाकर पूरा करने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार, शिल्पकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय और संसाधनों के बीच संतुलन की है। इसके साथ ही कुशल श्रमिकों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
बड़े मौसमी रोजगार तंत्र का हिस्सा भी
इसके बावजूद कुम्हारटोली में त्योहारों की आहट के साथ काम लगातार आगे बढ़ रहा है। सुबह से देर शाम तक कार्यशालाओं में कारीगर अपने-अपने हिस्से का काम पूरा करने में जुटे हैं। एक प्रतिमा तैयार होने में कई चरण और कई हाथ लगते हैं। इसलिए यहां बन रही प्रतिमाएं केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ ही एक बड़े मौसमी रोजगार तंत्र का हिस्सा भी हैं। कारीगरों का कहना है कि आने वाले सप्ताह हमारे लिए निर्णायक होंगे। त्योहारों का सिलसिला आगे बढ़ने के साथ प्रतिमाओं की मांग और काम दोनों बढ़ेंगे। हमारी कोशिश होगी कि बारिश, नमी, कच्चे माल और समय की चुनौतियों के बीच तय समय पर प्रतिमाएं तैयार की जा सकें।
Updated on:
12 Aug 2026 06:01 am
Published on:
12 Aug 2026 06:01 am
