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बोरियत का मीटर चालू, मनोरंजन की ‘बत्ती गुल…’

ल्म 'बत्ती गुल मीटर चालू' में बिजली नहीं होने के बावजूद बिल की मोटी रकम से पीड़ित लोगों की समस्या उठाई है, लेकिन फिल्म असरदार नहीं है

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जयपुर

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Aryan Sharma

Sep 21, 2018

Jaipur

बोरियत का मीटर चालू, मनोरंजन की 'बत्ती गुल...'

डायरेक्शन-एडिटिंग : श्री नारायण सिंह
राइटर : सिद्धार्थ-गरिमा
म्यूजिक : अनु मलिक, राहत फतेह अली खान, रोचक कोहली, सचेत-परम्परा
सिनेमैटोग्राफी : अंशुमान महाले
रनिंग टाइम : 175.35 मिनट
स्टार कास्ट : शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, दिव्येन्दु, यामी गौतम, फरीदा जलाल, सुधीर पांडे, सुप्रिया पिलगांवकर, समीर सोनी, अतुल श्रीवास्तव, सुष्मिता मुखर्जी, राजेंद्र चावला

आर्यन शर्मा/जयपुर. डायरेक्टर श्री नारायण सिंह ने फिल्म 'टॉयलेट : एक प्रेम कथा' में देश में शौचालय की समस्या को उठाया था। अब उन्होंने फिल्म 'बत्ती गुल मीटर चालू' में गांव और छोटे शहरों में बार-बार बत्ती गुल होने और बिजली के उपभोग की तुलना में अधिक बिल आने की समस्या पर ध्यान केन्द्रित किया है। लेकिन फिल्म की पटकथा और उसके प्रस्तुतिकरण ने मनोरंजन का मीटर चालू करने की बजाय उसकी बत्ती गुल कर दी है। कहानी उत्तराखंड के नई टिहरी में रहने वाले तीन दोस्तों एसके उर्फ सुशील कुमार पंत (शाहिद कपूर), ललिता नौटियाल उर्फ नौटी (श्रद्धा कपूर) व सुंदर मोहन त्रिपाठी (दिव्येन्दु) की है। एसके चालू टाइप का वकील है और लोगों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर धन ऐंठता रहता है। नौटी फैशन डिजाइनर है, वहीं त्रिपाठी प्रिंटिंग प्रेस लगाता है, जिसका बिजली का बिल लगातार ज्यादा आता रहता है। उसकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं होती। फिर उसके 54 लाख रुपए का बिल आ जाता है। यही कहानी का टर्निंग पॉइंट है। वह सिस्टम से लड़ता है, लेकिन नाकामी हाथ लगती है। फिर कुछ ऐसा होता है, जो सबको हिलाकर रख देता है।

पटकथा और प्रस्तुतिकरण कमजोर
फिल्म का सब्जेक्ट अच्छा है, लेकिन उसकी पटकथा पर काम नहीं किया गया। स्क्रीनप्ले ढीला है। वहीं तकरीबन हर संवाद में लोकल लैंग्वेज के शब्द 'ठहरा' और 'बल' का इस्तेमाल खीझ पैदा करता है। श्री नारायण सिंह का निर्देशन असरदार नहीं है। इसके साथ ही वह फिल्म का चुस्त संपादन करने में भी नाकाम रहे। फिल्म की ड्यूरेशन करीब तीन घंटे की है, जिसमें फ्लो की कमी है। इससे फिल्म बोर करने लगती है। फिल्म में कोर्टरूम दृश्य इंटरेस्टिंग हैं। शाहिद कपूर ने अपना किरदार दिलचस्प ढंग से अदा किया है। श्रद्धा ने नौटी के रोल में सहज अभिनय किया है। दिव्येन्दु की परफॉर्मेंस सराहनीय है। एडवोकेट के छोटे से रोल में यामी गौतम अपनी छाप छोड़ जाती हैं। अतुल श्रीवास्तव, सुष्मिता मुखर्जी सहित अन्य सपोर्टिंग कास्ट का काम ठीक है। फिल्म का गीत-संगीत अच्छा है। लोकेशंस और सिनेमैटोग्राफी आकर्षक है।

क्यों देखें : बिजली के मुद्दे पर आधारित 'बत्ती गुल मीटर चालू' में मनोरंजन गांव की बत्ती की तरह झिलमिलाते हुए गुल हो जाता है। अगर आप शाहिद के फैन हैं और बिजली के बिल की इस तरह की समस्या से दो-चार हुए हैं तो ही 'बत्ती गुल...' देखने जाएं।

रेटिंग: 2/5