26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘जयेशभाई…’ ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर

फिल्म समीक्षा: जयेशभाई जोरदार

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Aryan Sharma

May 14, 2022

'जयेशभाई...' ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर

'जयेशभाई...' ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर

दो घंटे की सुस्त जर्नी
यह कहानी है, गुजरात के प्रवीणगढ़ के जयेशभाई की। वह 9 वर्ष की बेटी का पिता है और जल्द ही एक बार फिर से पिता बनने वाला है। लेकिन, उसका गांव ऐसा है, जहां के लोगों की रूढ़िवादी मानसिकता है। यहां बेटी की कोई अहमियत नहीं है। जयेशभाई के माता-पिता परिवार के वारिस के तौर पर बेटा चाहते हैं। परीक्षण से पता चलता है कि जयेश की गर्भवती पत्नी मुद्रा लड़की को जन्म देने वाली है। ऐसे में जयेश अपनी अजन्मी संतान को बचाने के लिए पत्नी मुद्रा और बेटी सिद्धि के साथ घर छोड़कर निकल पड़ता है...। स्क्रिप्ट एकदम नीरस है। स्क्रीनप्ले एंगेजिंग नहीं है। दिव्यांग ठक्कर का निर्देशन भी कामचलाऊ है। उनकी पेशकश ऐसी नहीं है, जिससे दो घंटे तक जुड़ाव बना रहे और सिनेमाघर से निकलने के बाद भी इसके मैसेज पर चर्चा हो। फिल्म सुस्त गति से आगे बढ़ती है। गीत-संगीत कमजोर कड़ी है। सिनेमैटोग्राफी उपयुक्त है। परफॉर्मेंस की बात करें तो रणवीर सिंह (Ranveer Singh) ने गुजराती अंदाज को पकड़ने की अच्छी कोशिश की है। बोमन ईरानी (Boman Irani ) असरदार लगे हैं। शालिनी पांडे (Shalini Pandey) अपनी भूमिका में फिट हैं। रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah ) का किरदार सीमित है। वह कुछ अलग नहीं कर सकीं। जिया का चुलबुलापन इम्प्रेस करता है। पुनीत इस्सर ठीक लगे हैं। बहरहाल, 'जयेशभाई...' ने जोर तो लगाया, पर फिल्म 'जोरदार' नहीं बन पायी।

रेटिंग: ★½